जोधपुर, 12 मई।
मोटर दुर्घटना से जुड़े मुआवजे के मामलों में राजस्थान उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण व्यवस्था देते हुए नया कानूनी दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है, जिसमें न्यायाधीश मुकेश राजपुरोहित ने स्पष्ट किया कि आयकर रिटर्न के आधार पर मुआवजा तय करते समय मृत्यु के बाद दाखिल रिटर्न को भी स्वीकार किया जा सकता है।
अदालत ने कहा कि अब तक सामान्य रूप से केवल मृत्यु से पहले दाखिल आयकर रिटर्न को ही आधार माना जाता रहा है, लेकिन इस निर्णय से दावेदारों को राहत मिलने की संभावना बढ़ गई है।
इस मामले में बीमा कंपनी टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस को बढ़ी हुई मुआवजा राशि के साथ ब्याज सहित भुगतान करने का निर्देश दिया गया है।
मामला मोहनलाल और सरला देवी नागर की अपील से जुड़ा था, जिन्होंने अपने पुत्र की सड़क दुर्घटना में मृत्यु के बाद मुआवजा निर्धारण को चुनौती दी थी और आय के सही आकलन की मांग की थी।
दलीलों में यह कहा गया कि वित्तीय वर्ष की समाप्ति के बाद दाखिल किया गया आयकर रिटर्न भी वास्तविक आय को दर्शाता है और उसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
वहीं बीमा पक्ष ने इसे स्वीकार करने का विरोध करते हुए पूर्व में दर्ज आय के आधार पर मुआवजे को सही बताया था, लेकिन अदालत ने उनके तर्क को अस्वीकार कर दिया।
न्यायालय ने रिकॉर्ड और दस्तावेजों के आधार पर यह माना कि प्रस्तुत रिटर्न वैध है और इसे अस्वीकार करने का कोई ठोस आधार नहीं है।
इसके बाद अदालत ने आय के नए आंकड़ों के आधार पर मुआवजा राशि में उल्लेखनीय वृद्धि करते हुए ब्याज सहित भुगतान का आदेश पारित किया।








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