चेन्नई, 12 मई।
मद्रास उच्च न्यायालय ने मंगलवार को एक अंतरिम आदेश जारी करते हुए तमिलगा वेत्रि कषगम के विधायक श्रीनिवास सेठुपति को विधानसभा में होने वाले विश्वास मत की प्रक्रिया में भाग लेने से रोक दिया है। यह आदेश डाक मतपत्रों में कथित अनियमितता की शिकायत के बाद पारित किया गया।
मामला उस चुनाव से जुड़ा है जिसमें शिवगंगा जिले की तिरुपत्तूर सीट पर द्रमुक के पूर्व मंत्री पेरियाकरुप्पन को मात्र एक वोट से हार का सामना करना पड़ा था। चुनाव परिणाम में उन्हें कुल 83,374 मत प्राप्त हुए थे।
इसके बाद पेरियाकरुप्पन ने चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि डाक मतपत्र गलत विधानसभा क्षेत्र में पहुंच गया, जिससे परिणाम प्रभावित हुआ। उन्होंने मांग की कि उस मत को सही विधानसभा क्षेत्र में जोड़ा जाए।
चुनाव आयोग द्वारा कार्रवाई न किए जाने पर उन्होंने उच्च न्यायालय का रुख किया और मतगणना से जुड़े दस्तावेज सुरक्षित रखने के साथ-साथ विजयी उम्मीदवार को तत्काल कार्य करने से रोकने की मांग की।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष ने आरोप लगाया कि डाक मतपत्र से जुड़ी प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही हुई, जिससे चुनाव परिणाम पर असर पड़ा। वहीं चुनाव आयोग ने कहा कि नियमों के अनुसार देर से प्राप्त मतपत्रों को शामिल नहीं किया जा सकता।
मामले की सुनवाई के बाद न्यायालय ने माना कि शिकायत में पर्याप्त आधार हैं और अगली सुनवाई तक विधायक को मतदान प्रक्रियाओं में भाग लेने से रोकने का अंतरिम आदेश दिया।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश चुनाव परिणाम को निरस्त नहीं करता, बल्कि केवल दस्तावेजों की सुरक्षा और मामले की जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से दिया गया है।
इसके साथ ही चुनाव आयोग को निर्देश दिया गया कि सभी डाक मतपत्र, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेज सुरक्षित रखे जाएं तथा यह जांच की जाए कि कितने मतपत्र गलत क्षेत्रों में गए।
मामले की अगली सुनवाई 19 जून को निर्धारित की गई है।








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