अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के दौरान पाकिस्तान द्वारा ईरानी सैन्य विमानों को अपने हवाई अड्डों पर पनाह देने का मामला सामने आया है। आरोप है कि इस्लामाबाद ने अमेरिका के संभावित हवाई हमलों से ईरानी सैन्य संपत्तियों को बचाने के लिए यह कदम उठाया।
एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने शांति वार्ता के दौरान ईरानी सैन्य विमानों को अपने एयरबेस पर खड़ा करने की अनुमति दी। इस कदम का उद्देश्य अमेरिकी हमलों से ईरान की सैन्य क्षमताओं को सुरक्षित रखना बताया जा रहा है। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि ईरान ने अपने कुछ नागरिक विमानों को अफगानिस्तान में भी स्थानांतरित किया था।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार यह पूरा मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। बताया गया कि युद्धविराम की घोषणा के कुछ दिनों बाद ईरान ने अपने कई विमान पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस पर भेजे, जो रावलपिंडी के पास स्थित एक महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाना है। इनमें एक आरसी-130 टोही विमान भी शामिल बताया गया, जिसका उपयोग खुफिया जानकारी जुटाने में किया जाता है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है और इस संबंध में संबंधित देशों से प्रतिक्रिया भी मांगी गई है। हालांकि पाकिस्तानी अधिकारियों ने नूर खान एयरबेस पर विमानों की मौजूदगी के दावों को खारिज करते हुए कहा कि ऐसा कोई बड़ा बेड़ा वहां छिपाकर रखना संभव नहीं है।
अफगान नागरिक उड्डयन अधिकारियों ने बताया कि युद्ध से पहले एक ईरानी नागरिक विमान काबुल में उतरा था, जो हवाई क्षेत्र बंद होने के बाद वहीं खड़ा रहा। बाद में सुरक्षा कारणों से उसे हेरात एयरपोर्ट पर स्थानांतरित किया गया। इसे अफगानिस्तान में मौजूद एकमात्र ईरानी विमान बताया गया है।
तालिबान प्रवक्ता ने हालांकि अफगानिस्तान में किसी भी ईरानी विमान की मौजूदगी से इनकार किया है। इसी बीच यह भी कहा गया है कि पिछले वर्षों में पाकिस्तान की सैन्य जरूरतों के लिए चीन पर निर्भरता काफी बढ़ी है और उसका अधिकांश हथियार आयात चीन से होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान इस पूरे घटनाक्रम में संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है और अमेरिका व ईरान दोनों पक्षों के साथ संबंध साधने की रणनीति अपना रहा है।







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