राजधानी भोपाल में निजी मल्टी-स्पेशलिटी अस्पतालों की संख्या में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं के व्यवसायीकरण को लेकर चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। विभिन्न ऑनलाइन आंकड़ों के अनुसार शहर में निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम्स की संख्या 350 से अधिक पहुंच चुकी है, जबकि NABH मान्यता प्राप्त बड़े मल्टी-स्पेशलिटी अस्पतालों की संख्या लगभग 50 से 100 के बीच अनुमानित है।
शहर में बंसल हॉस्पिटल, अपोलो सेज हॉस्पिटल, चिरायु मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, नर्मदा हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, आरकेडीएफ मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल, नोबल मल्टीस्पेशलिटी, हजेला, गैलेक्सी और नीलय हॉस्पिटल जैसे प्रमुख संस्थान सक्रिय हैं। इनमें से कई अस्पतालों में आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं जैसे ICU, ट्रॉमा सेंटर, हृदय रोग, किडनी, लीवर ट्रांसप्लांट और न्यूरो सर्जरी जैसी सेवाएं उपलब्ध हैं।
NABH प्रमाणन को अस्पतालों में गुणवत्ता का प्रमुख मानक माना जाता है, जिसके तहत रोगी सुरक्षा, संक्रमण नियंत्रण, दवा प्रबंधन और चिकित्सा प्रक्रियाओं में सुधार सुनिश्चित किया जाता है। इससे चिकित्सा त्रुटियों में कमी, बिलिंग में पारदर्शिता और रिकॉर्ड व्यवस्था में सुधार देखा जाता है। इसके साथ ही संसाधनों का बेहतर उपयोग, स्टाफ प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं में प्राथमिकता जैसे लाभ भी मिलते हैं।
सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए NABH प्रमाणन को अनिवार्य करने की दिशा में कदम उठाए हैं। मार्च 2026 में आयुष्मान भारत योजना के तहत सभी पैनल अस्पतालों के लिए अंतिम स्तर का NABH अनुपालन जरूरी किया गया है। इसके बाद भोपाल में पैनल में शामिल 204 निजी अस्पतालों में से केवल 93 ही मान्यता प्राप्त पाए गए, जबकि नियमों का पालन न करने वाले 51 अस्पतालों को योजना से हटा दिया गया। चार प्रमुख शहरों में कुल 126 अस्पताल इस सूची से बाहर किए गए हैं।
सरकारी अस्पतालों में अभी भी बड़ी संख्या में मरीजों का इलाज जारी है, जिनमें एम्स भोपाल, हमीदिया अस्पताल, जेपी अस्पताल, सुल्तानिया अस्पताल और किंग जॉर्ज अस्पताल प्रमुख हैं। हालांकि इनमें बेड की कमी, उपकरणों के रखरखाव और स्टाफ की कमी जैसी चुनौतियां भी सामने आती रहती हैं।
वहीं निजी अस्पतालों में इलाज को लेकर अनावश्यक जांच, लंबी भर्ती और अधिक शुल्क जैसी शिकायतें भी सामने आती हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत निगरानी की जाती है और NABH मानकों के पालन से स्थिति में सुधार की कोशिश की जा रही है।
मरीजों को सलाह दी जा रही है कि वे NABH मान्यता प्राप्त अस्पतालों का चयन करें, इलाज से पहले दूसरी राय लें और बिलिंग की पूरी जानकारी रखें। किसी भी अनियमितता की स्थिति में संबंधित हेल्पलाइन या स्वास्थ्य विभाग से संपर्क करने की भी अपील की गई है।





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