कटनी, 16 जुलाई।
मध्य प्रदेश में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। कटनी जिले में स्लीमनाबाद वाटर टनल की खुदाई का कार्य पूरा हो गया है। करीब 1600 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह 11.952 किलोमीटर लंबी टनल देश की सबसे लंबी वाटर टनल मानी जा रही है। इसके माध्यम से नर्मदा का पानी प्राकृतिक ढलान के जरिए बिना किसी पंप के सोन बेसिन तक पहुंचेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा घोषित कृषक कल्याण वर्ष के अंतर्गत सिंचाई परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। इसी क्रम में इस परियोजना को महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। टनल बोरिंग मशीन निर्धारित अंतिम बिंदु तक पहुंचने के साथ ही खुदाई का कार्य पूरा हो गया है।
बरगी व्यपवर्तन परियोजना की दाहिनी तट मुख्य नहर के किलोमीटर 104 से 116.865 के बीच इस टनल का निर्माण करीब डेढ़ दशक से जारी था। इसके आगे 129 किलोमीटर तक नहर खुले स्वरूप में विकसित की जाएगी। नहर की जल प्रवाह क्षमता 152 क्यूमेक तथा टनल का व्यास 10.140 मीटर है।
परियोजना पूरी होने के बाद लगभग 1.85 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई का लाभ मिलेगा। नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के अनुसार इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ क्षेत्र के आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी। साथ ही कटनी शहर के लिए नर्मदा का पेयजल उपलब्ध होगा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को भी इसका लाभ मिलेगा।
इस परियोजना से कटनी, मैहर, सतना, पन्ना और रीवा जिले सीधे लाभान्वित होंगे। इन पांच जिलों में कुल मिलाकर लगभग 1.85 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
बरगी व्यपवर्तन परियोजना के तहत जबलपुर स्थित बरगी बांध से निकलने वाली स्लीमनाबाद दाहिनी तट मुख्य नहर प्रदेश की सबसे अधिक 227 क्यूमेक जल वहन क्षमता वाली नहर होगी। परियोजना पूरी होने के बाद नर्मदा का जल सोन नदी बेसिन तक पहुंचेगा, जिससे सिंचाई के साथ पेयजल उपलब्धता में भी सुधार होगा और क्षेत्र में कृषि तथा ग्रामीण विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।














