जयपुर, 28 जुलाई।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने वर्ष 2025 के चर्चित 30 लाख रुपये रिश्वत प्रकरण में करीब नौ-दस महीने से फरार चल रहे तत्कालीन पटवारी नरेन्द्र मीणा को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपित उस समय जयपुर जिले की कालवाड़ तहसील के हाथोज पटवार हल्के में पदस्थापित था। उस पर भूमि का नामांतरण खोलने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप है।
एसीबी के महानिदेशक गोविंद गुप्ता ने बताया कि सितंबर 2025 में परिवादी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि करीब 10 बीघा भूमि का नामांतरण खोलने के एवज में तत्कालीन पटवारी नरेन्द्र मीणा अपने और तत्कालीन तहसीलदार के नाम पर 50 लाख रुपये की रिश्वत मांग रहा है। शिकायत के सत्यापन में रिश्वत मांग की पुष्टि हुई। जांच के दौरान सामने आया कि बाद में यह राशि 30 लाख रुपये तय की गई और इसे कथित मध्यस्थ विकास शर्मा के जरिए लेने की योजना बनाई गई। इसके बाद 21 सितंबर 2025 को एसीबी ने ट्रैप कार्रवाई करते हुए विकास शर्मा को 30 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया था, जबकि मुख्य आरोपित नरेन्द्र मीणा मौके से फरार हो गया था।
अनुसंधान में यह प्रमाणित हुआ कि नरेन्द्र मीणा ने विकास शर्मा के साथ मिलीभगत कर परिवादी से अवैध रिश्वत की मांग की और मध्यस्थ के माध्यम से राशि लेने का प्रयास किया। आरोपित के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित-2018) की धारा 7 तथा भारतीय न्याय संहिता की धारा 61(2) के तहत अपराध प्रमाणित पाया गया। एसीबी ने उसे भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 35(3) के तहत अनुसंधान में उपस्थित होने का नोटिस भी जारी किया था, लेकिन वह लगातार फरार रहा। लगातार निगरानी और सूचना संकलन के बाद मंगलवार को एसीबी टीम ने जयपुर के कालवाड़ रोड स्थित चम्पापुरा स्थित उसके आवास पर दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया। आरोपित को न्यायालय में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया जाएगा।


















