तेहरान, 13 अप्रैल
होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ समुद्री नाकाबंदी लागू किए जाने की घोषणा के बाद तनाव बढ़ गया है। यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर लागू किया गया है, जिसके तहत इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने वाले सभी जहाजों की कड़ी जांच की जाएगी। खासतौर पर उन जहाजों पर नजर रखी जाएगी जिन पर ईरान को टोल देने या उससे जुड़े होने का संदेह है।
अमेरिकी प्रशासन के अनुसार यह नाकाबंदी शाम 7:30 बजे से प्रभावी हुई, जिसका उद्देश्य ईरान की आर्थिक गतिविधियों को सीमित करना और उस पर दबाव बढ़ाना बताया गया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि कोई ईरानी जहाज इस प्रतिबंध के दायरे में आता है, तो उसे तत्काल नष्ट किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि समुद्र में अवैध गतिविधियों पर रोक के लिए सख्त रणनीति अपनाई जाएगी।
इधर ईरान के भारत में राजदूत ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज मार्ग से गुजरने वाले भारतीय जहाजों से किसी प्रकार का टोल नहीं लिया गया है और उन्हें सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे क्षेत्रीय व्यापार पर आंशिक आश्वासन मिला है।
रिपोर्टों के अनुसार नाकाबंदी लागू होने के बाद दो जहाज वापस लौट गए हैं, जिनमें एक जहाज चीन का बताया जा रहा है और उस पर नकली झंडा लगा हुआ था।
इस बीच इजराइल के प्रधानमंत्री ने अमेरिका के इस कदम का समर्थन किया है और कहा है कि ईरान की गतिविधियों को देखते हुए यह कार्रवाई उचित है तथा उनका देश अमेरिका के साथ खड़ा है।
वहीं रूस ने इस नाकाबंदी का विरोध करते हुए इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए हानिकारक बताया है। रूस के प्रवक्ता ने कहा कि इस निर्णय के कई पहलू स्पष्ट नहीं हैं और इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
होर्मुज क्षेत्र में बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है, क्योंकि यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है।








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