नई दिल्ली, 13 अप्रैल।
राष्ट्रीय कृषि बाजार ई-नाम डिजिटल मंच से देशभर की 1656 मंडियां जुड़ चुकी हैं और इस पर एक करोड़ 80 लाख से अधिक किसान, 2.73 लाख व्यापारी तथा 4724 किसान उत्पादक संगठन पंजीकृत हो चुके हैं। सरकार ने सोमवार को यह जानकारी दी।
आधिकारिक विवरण के अनुसार, पिछले दस वर्षों में इस मंच के माध्यम से 13.25 करोड़ मीट्रिक टन कृषि उपज का व्यापार हुआ है, जिसकी कुल कीमत 4.84 लाख करोड़ रुपये रही है।
सरकार द्वारा प्रत्येक मंडी को आधारभूत ढांचा विकसित करने के लिए अधिकतम 75 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता भी दी जा रही है, जिससे डिजिटल प्रणाली से मंडियों का जुड़ाव मजबूत हो रहा है और बाजार की कार्यक्षमता में सुधार आ रहा है। इसके साथ ही हितधारकों की संख्या में भी लगातार वृद्धि दर्ज की गई है।
ई-नाम मोबाइल अनुप्रयोग अब 247 कृषि उत्पादों के दाम की जानकारी उपलब्ध करा रहा है, जिससे किसानों को सही समय पर निर्णय लेने में मदद मिल रही है।
यह पोर्टल कृषि व्यापार की पूरी प्रक्रिया को कवर करता है, जिसमें डिजिटल गेट एंट्री, लॉट निर्माण, गुणवत्ता परीक्षण, ऑनलाइन बोली, वास्तविक समय में बोली की निगरानी, मूल्य निर्धारण और किसानों के बैंक खातों में सीधे भुगतान जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
ई-नाम डिजिटल तंत्र में वेब पोर्टल, मोबाइल एप, हेल्पलाइन, मानव सहायता ढांचा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित गुणवत्ता जांच प्रणाली जैसी बहुस्तरीय व्यवस्था शामिल है।
यह मंच किसानों को अधिक खरीदारों तक पहुंच प्रदान करता है, जिससे उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ती है।
साथ ही यह डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देता है, जिससे कृषि विपणन प्रणाली में वित्तीय समावेशन और लेनदेन की पारदर्शिता मजबूत होती है।
मंडियों का दायरा भी लगातार बढ़ रहा है, जहां 2024 में 1389 मंडियां जुड़ी थीं, वहीं मार्च 2026 तक इनकी संख्या बढ़कर 1656 हो गई है।
इस मंच पर ऑनलाइन शिकायत निवारण प्रणाली भी उपलब्ध है, जिसके जरिए उपयोगकर्ता अपनी समस्याएं और सुझाव सीधे दर्ज कर सकते हैं। यह व्यवस्था किसानों और नए उपयोगकर्ताओं को समय पर तकनीकी सहायता प्रदान करने में सहायक साबित हो रही है।








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