संपादकीय
07 May, 2026

आंधी-बारिश की मार खेत से खलिहान, गोदामों तक तबाह हुई फसल, भरपाई की राह कठिन

भारी आंधी और बारिश से मध्य प्रदेश के कई जिलों में फसलों को व्यापक नुकसान हुआ है, जिससे खेत से लेकर भंडारण तक उपज प्रभावित होने के साथ किसानों के लिए आर्थिक भरपाई की चुनौती और अधिक गंभीर हो गई है।

07 मई।
मध्य प्रदेश के कई जिलों — रायसेन, विदिशा, नर्मदापुरम (होशंगाबाद), भोपाल, राजगढ़, नरसिंहपुर, बुंदेलखंड, महाकौशल और मालवा — में पिछले एक सप्ताह के दौरान आई तेज आंधी और बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। पहले खेतों में खड़ी फसल प्रभावित हुई और अब कटाई के बाद खलिहानों व घरों के बाहर रखी उपज भी भीगकर खराब हो गई है। गेहूं का रंग बदलना, दानों का काला पड़ना और नमी बढ़ जाना किसानों के लिए दोहरी मार बनकर सामने आया है।
कटाई के बाद किसान अपनी फसल को मंडियों तक पहुंचाने की तैयारी में थे। कई स्थानों पर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में लदी फसल लंबी कतारों में खड़ी थी, तभी अचानक मौसम ने करवट ले ली। तेज हवाओं और बारिश ने न सिर्फ फसल को भिगो दिया, बल्कि उसकी गुणवत्ता भी घटा दी। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि ऐसी खराब हुई फसल को कौन खरीदेगा और किसानों को उनका उचित मूल्य कैसे मिलेगा।
सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अधिकारियों को तुरंत सर्वे करने और राहत कार्य शुरू करने के निर्देश दिए हैं। प्राथमिक स्तर पर राजस्व और कृषि विभाग की टीमें नुकसान का आकलन कर रही हैं। राज्य सरकार आपदा राहत कोष के तहत किसानों को मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है। हालांकि यह मुआवजा अक्सर वास्तविक नुकसान की तुलना में सीमित होता है, जिससे किसानों की पूरी भरपाई नहीं हो पाती।
इंश्योरेंस कंपनियों की भूमिका भी इस समय अहम हो जाती है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत जिन किसानों ने बीमा कराया है, वे दावा कर सकते हैं, लेकिन बीमा क्लेम की प्रक्रिया जटिल और समय लेने वाली होती है। कई बार सर्वे में देरी या तकनीकी कारणों से किसानों को समय पर भुगतान नहीं मिल पाता। इसके अलावा सभी किसानों ने बीमा नहीं कराया होता, जिससे बड़ी संख्या इस सुरक्षा कवच से बाहर रह जाती है।
जहां तक समर्थन मूल्य पर खरीद का सवाल है, सरकार के सामने चुनौती यह है कि गुणवत्ता मानकों से नीचे गई फसल को कैसे खरीदा जाए। यदि नमी अधिक है या दाने काले पड़ गए हैं, तो मंडियों में कटौती या अस्वीकृति का खतरा रहता है। ऐसे में सरकार को विशेष छूट या मानकों में लचीलापन लाने पर विचार करना पड़ सकता है, ताकि किसानों को न्यूनतम नुकसान हो।
यह संकट सिर्फ प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि नीति और क्रियान्वयन की परीक्षा भी है। त्वरित सर्वे, पारदर्शी मुआवजा, सरल बीमा प्रक्रिया और लचीली खरीद नीति ही किसानों को इस मुश्किल समय से उबार सकती है। 
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