गुवाहाटी, 10 अप्रैल।
असम माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा आयोजित हाई स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट (HSLC) परीक्षाओं के उत्तीर्ण प्रतिशत में पिछले तीन दशकों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। 1994 में जहां पास प्रतिशत मात्र 30.9 था, वहीं 2026 में यह बढ़कर 65.62 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
आंकड़े राज्य की शिक्षा व्यवस्था में लगातार हो रहे सुधार को दर्शाते हैं, जिसमें बेहतर बुनियादी ढांचे, उन्नत शिक्षण पद्धतियों और छात्रों की बढ़ती भागीदारी का योगदान बताया गया है। हालांकि समग्र प्रवृत्ति सुधार की ओर है, लेकिन समय-समय पर नीतिगत बदलावों और परिस्थितियों के कारण उतार-चढ़ाव भी देखने को मिले हैं।
1990 के दशक के अंत और 2000 के शुरुआती वर्षों में परिणाम अपेक्षाकृत कमजोर रहे, जो 28.9 से 38.7 प्रतिशत के बीच सीमित रहे। 1997 में सबसे कम 28.9 प्रतिशत उत्तीर्ण दर दर्ज की गई थी। इसके बाद 2005 में पहली बार परिणाम 50 प्रतिशत से ऊपर पहुंचे और सुधार की प्रक्रिया शुरू हुई।
2011 से 2016 के बीच परिणाम सामान्यतः 60 प्रतिशत से अधिक रहे। 2013 में 70.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसे बेहतर शैक्षणिक व्यवस्था और संसाधनों तक पहुंच का संकेत माना गया। हालांकि 2017 में परिणाम गिरकर 47.9 प्रतिशत तक पहुंच गए, जो हाल के वर्षों की बड़ी गिरावटों में से एक थी।
2021 में परिणाम ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गए और 93.1 प्रतिशत तक दर्ज हुए, जिसे महामारी के दौरान अपनाई गई वैकल्पिक मूल्यांकन प्रणाली का प्रभाव माना गया। इसके बाद 2022 में 56.4 प्रतिशत, 2023 में 72.6 प्रतिशत और 2024 में 75.7 प्रतिशत परिणाम दर्ज किए गए।
2025 में यह आंकड़ा घटकर 63.98 प्रतिशत रहा, जबकि 2026 में यह मामूली बढ़त के साथ 65.62 प्रतिशत पर पहुंच गया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रवृत्ति शिक्षा क्षेत्र में लगातार सुधार और ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के विस्तार को दर्शाती है, हालांकि निरंतर स्थिरता बनाए रखना आवश्यक है।


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