ऋषिकेश, 20 मई ।
सिखों के पवित्र तीर्थस्थल हेमकुंड साहिब की यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं का उत्साह बुधवार को उस समय देखने को मिला, जब ऋषिकेश स्थित गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब से पहला जत्था पंज प्यारों की अगुवाई में रवाना हुआ। गुरुद्वारा परिसर गुरबाणी और ‘जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल’ के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ यात्रा की शुरुआत की। 23 मई को हेमकुंड साहिब के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे।
पहले जत्थे को दिल्ली के उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू, उत्तराखंड के परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा और परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान पंज प्यारों का पारंपरिक सम्मान किया गया और संगत पर पुष्प वर्षा की गई। अरदास के बाद श्रद्धालु यात्रा पर निकल पड़े।
इस अवसर पर तरणजीत सिंह संधू ने कहा कि हेमकुंड साहिब यात्रा भारतीय संस्कृति की उस परंपरा का प्रतीक है, जिसमें आध्यात्मिकता और साहस साथ चलते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह का संदेश आज भी मानवता, धर्म और साहस के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उनके अनुसार यह यात्रा केवल कठिन पर्वतीय सफर नहीं, बल्कि आत्मिक साधना और आत्ममंथन का माध्यम भी है।
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि हेमकुंड साहिब त्याग, सेवा, तप और साहस की पवित्र भूमि है। गुरु गोबिंद सिंह और साहिबजादों का बलिदान भारतीय इतिहास का गौरवशाली अध्याय है। उन्होंने कहा कि गंगा, गुरबाणी और हिमालय का संगम विश्व को शांति और सहअस्तित्व का संदेश देता है।
कार्यक्रम के दौरान उत्तराखंड के राज्यपाल के कार्यों पर आधारित पुस्तक “गुरसेवक” और डॉ. गुरदीप कौर की पुस्तक “समरी ऑफ कृष्ण अवतार फ्रॉम दशम ग्रंथ साहिब” का विमोचन भी किया गया। हेमकुंड साहिब ट्रस्ट के अध्यक्ष सरदार नरेन्द्रजीत सिंह बिंद्रा ने श्रद्धालुओं से यात्रा की पवित्रता बनाए रखने, प्रशासनिक निर्देशों का पालन करने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति सजग रहने की अपील की।
चमोली जिले में समुद्र तल से करीब 15 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित हेमकुंड साहिब सिख समुदाय का प्रमुख आस्था केंद्र है। बर्फबारी के चलते यह यात्रा हर वर्ष सीमित समय के लिए संचालित होती है। प्रशासन ने यात्रा मार्ग पर सुरक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सुविधाओं के विशेष इंतजाम किए हैं।














