होर्मुज़, 10 अप्रैल 2026।
तेहरान और वाशिंगटन के बीच 8 अप्रैल से लागू दो सप्ताह के संघर्ष विराम के बावजूद होर्मुज़ जलडमरूमध्य से समुद्री यातायात अभी भी सामान्य नहीं हो पाया है। जहाजों की आवाजाही पूर्व संकट के स्तर की तुलना में काफी कम बनी हुई है और व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हैं।
उद्योग से जुड़े अनुमानों के अनुसार, जलडमरूमध्य से गुजरने वाला यातायात लगभग 95 प्रतिशत तक घट गया है। वर्तमान में केवल सीमित संख्या में जहाज ही आवागमन कर पा रहे हैं, जिनमें अधिकतर ईरान से जुड़े, तथाकथित ‘डार्क फ्लीट’ के जहाज या फिर रूस और चीन जैसे देशों के झंडे वाले पोत शामिल हैं, जिन्हें तेहरान गैर-शत्रुतापूर्ण मानता है।
सूत्रों के मुताबिक, जिन जहाजों को गुजरने की अनुमति मिल रही है, उन्हें पारंपरिक अंतरराष्ट्रीय मार्गों के बजाय ईरानी तट के उत्तरी हिस्से में एक संकीर्ण गलियारे से होकर भेजा जा रहा है। इस मार्ग की निगरानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स द्वारा की जा रही है।
दूसरी ओर, 800 से अधिक भारी वाणिज्यिक जहाज जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में फंसे हुए हैं। युद्ध जोखिम बीमा की लागत भी अब तक ऊंची बनी हुई है, जिससे प्रमुख शिपिंग कंपनियां सामान्य संचालन बहाल करने में देरी कर रही हैं। कंपनियों को कानूनी और वित्तीय चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि पारगमन शुल्क का भुगतान प्रतिबंधों से टकरा सकता है, जबकि बिना बीमा के संचालन से भारी नुकसान का खतरा बना हुआ है।
संघर्ष विराम के बावजूद खाड़ी देशों के तेल टैंकरों को भी कई बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। ईरान ने चयनित मार्गों से गुजरने के नियम और शुल्क लागू किए हैं, जो प्रति जहाज दो मिलियन डॉलर तक पहुंच सकते हैं। कुछ मामलों में भुगतान चीनी मुद्रा में करने की मांग भी सामने आई है, जिससे प्रतिबंधों से जुड़े बैंकिंग नियमों को दरकिनार किया जा सके।
इसके अलावा जहाजों को पहले से अनुमति लेना, राजनीतिक जांच प्रक्रिया से गुजरना और निर्धारित मार्गों का पालन करना अनिवार्य किया गया है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के अनुसार, 11 से 14 अप्रैल के बीच सीमित अवधि के लिए मानवीय राहत के तहत करीब 20 हजार फंसे नाविकों को निकालने की संभावना बन सकती है।
संचालन संबंधी प्रतिबंधों के अलावा ईरान उन जहाजों पर भी कड़ी शर्तें लागू कर रहा है, जिन्हें मित्र या तटस्थ माना जाता है, जिससे समुद्री व्यापार की स्थिति अब भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।









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