भोपाल, 02 जून ।
कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल ने मंगलवार को प्रदेश के शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के संयुक्त संचालकों, प्राचार्यों और विभागीय अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा बैठक की। बैठक में आगामी प्रवेश सत्र, प्रशिक्षण की गुणवत्ता, परीक्षा तैयारियों तथा रोजगार और प्लेसमेंट गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक में कौशल विकास संचालनालय के संचालक बसंत कुर्रे और एमपीएसएसडीईजीबी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी गिरीश शर्मा भी मौजूद रहे। इस दौरान मंत्री टेटवाल ने एसएसआर ग्लोबल स्किल्स पार्क के उन प्रशिक्षणार्थियों के अभिभावकों से संवाद किया, जिनका चयन एसआरएफ लिमिटेड की अंतरराष्ट्रीय इकाई में हुआ है।
बैठक में जानकारी दी गई कि जुलाई 2024 बैच के तीन प्रशिक्षणार्थी वर्तमान में कंपनी की हंगरी स्थित इकाई में सेवाएं दे रहे हैं। मंत्री टेटवाल ने इसे प्रदेश की कौशल विकास व्यवस्था की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि मध्यप्रदेश के युवा अब वैश्विक स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने चयनित युवाओं और उनके परिवारों को शुभकामनाएं भी दीं।
मंत्री टेटवाल ने कहा कि कौशल विकास को रोजगार से जोड़ने के लिए राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष संचालित ‘चलो आईटीआई अभियान’ के सकारात्मक परिणाम सामने आए थे और उपलब्ध सीटों पर 95 प्रतिशत से अधिक प्रवेश दर्ज किए गए थे।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष प्रदेश के आईटीआई संस्थानों में लगभग 55 हजार से अधिक सीटें उपलब्ध हैं। लक्ष्य है कि पिछले वर्ष की तुलना में अधिक से अधिक युवाओं को कौशल प्रशिक्षण से जोड़ा जाए और प्रवेश का लक्ष्य पूरी तरह हासिल किया जाए।
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आईटीआई के माध्यम से उपलब्ध रोजगार, स्वरोजगार, अप्रेंटिसशिप और उच्च शिक्षा के अवसरों की जानकारी युवाओं और अभिभावकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाई जाए। साथ ही सफल प्रशिक्षणार्थियों की प्रेरक कहानियों का व्यापक प्रचार-प्रसार भी सुनिश्चित किया जाए ताकि अधिक युवा तकनीकी शिक्षा की ओर आकर्षित हों।
बैठक में आगामी एनसीवीटी और एससीवीटी परीक्षाओं की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने प्रशिक्षण अधिकारियों को विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक मार्गदर्शन देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि परीक्षा के बाद प्रत्येक प्रशिक्षणार्थी को रोजगार, अप्रेंटिसशिप, उच्च शिक्षा अथवा ग्लोबल स्किल्स पार्क जैसी उन्नत प्रशिक्षण व्यवस्थाओं से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं।
उन्होंने कहा कि कौशल प्रशिक्षण का मूल उद्देश्य युवाओं को आत्मनिर्भर और रोजगार योग्य बनाना है। इसके लिए सभी संस्थानों को परिणाम आधारित कार्यप्रणाली अपनाकर युवाओं के भविष्य को मजबूत बनाने की दिशा में कार्य करना होगा।











