भोपाल, 03 जून ।
मध्यप्रदेश सरकार ने ग्रामीण आबादी के भू-खण्ड संबंधी अधिकारों को कानूनी सुरक्षा देने की दिशा में बड़ा निर्णय लेते हुए ‘स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026’ लागू करने का फैसला किया है। इस योजना के तहत ग्रामीण नागरिकों को दिए जाने वाले अधिकार अभिलेखों के पंजीयन पर किसी प्रकार की स्टॉम्प ड्यूटी या पंजीयन शुल्क नहीं लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि योजना का उद्देश्य ग्रामीण नागरिकों को उनकी संपत्तियों का वैधानिक अधिकार प्रदान करना और आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। उन्होंने बताया कि अधिकार अभिलेखों के पंजीयन पर आने वाले लगभग 3800 करोड़ रुपये के व्यय का वहन राज्य सरकार स्वयं करेगी।
योजना के तहत स्वामित्व अधिकार प्राप्त करने वाले भू-खण्डधारकों को बैंकों और वित्तीय संस्थानों से ऋण प्राप्त करने में आसानी होगी। पंजीकृत अभिलेखों के आधार पर नागरिक गृह निर्माण, व्यवसाय विस्तार और कृषि गतिविधियों के लिए अधिक सरलता से ऋण हासिल कर सकेंगे।
सरकार द्वारा स्वामित्व अधिकारों के वितरण के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा, जिससे निर्धारित समय-सीमा में पात्र हितग्राहियों तक लाभ पहुंचाया जा सके। आधुनिक ड्रोन तकनीक से तैयार किए गए डिजिटल मानचित्रों के आधार पर संपत्तियों का रिकॉर्ड तैयार किया गया है, जिससे भविष्य में भूमि संबंधी विवादों में कमी आने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि स्वामित्व योजना के अंतर्गत अब तक 68.11 लाख अधिकार अभिलेख तैयार किए जा चुके हैं। इनमें 48.32 लाख निजी संपत्तियों तथा 19.79 लाख शासकीय संपत्तियों से जुड़े अभिलेख शामिल हैं। प्रदेश के अधिकांश गांवों में योजना का कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है।
योजना के प्रभावी संचालन और निगरानी के लिए आयुक्त भू-संसाधन प्रबंधन की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति गठित की जाएगी। इसके अलावा योजना के प्रचार-प्रसार और जन-जागरूकता गतिविधियों के लिए अलग से राशि भी स्वीकृत की गई है।











