वाशिंगटन, 13 अप्रैल।
ईरान युद्ध के चलते वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बढ़ते प्रभाव को लेकर सोमवार को चिंताएं और गहरी हो गईं, जहां कई देशों ने ऊर्जा कीमतों में तेजी से निपटने के लिए आपातकालीन कदमों की घोषणा की, वहीं कुछ देशों ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग की मांग भी उठाई।
यह संघर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए कोविड महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद तीसरा बड़ा झटका बनकर उभरा है और इसी कारण इस सप्ताह वाशिंगटन में होने वाली अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की बैठक में यह मुद्दा प्रमुख रूप से छाया रहेगा।
होर्मुज स्ट्रेट के जरिए तेल आपूर्ति जल्द बहाल होने की उम्मीदों को उस समय झटका लगा, जब सप्ताहांत में अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता विफल रही, जिससे पहले से ही नाजुक संघर्षविराम पर संकट और बढ़ गया।
अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों ने पहले ही संकेत दे दिए हैं कि इस युद्ध के कारण वैश्विक आर्थिक वृद्धि के अनुमान घटाए जा सकते हैं और महंगाई बढ़ने की संभावना है, जिसका सबसे अधिक असर उभरते और विकासशील देशों पर पड़ेगा।
नाइजीरिया ने कहा कि बढ़ती ईंधन कीमतों से निपटने के लिए उसे अंतरराष्ट्रीय मदद की जरूरत पड़ेगी, हालांकि कच्चे तेल के ऊंचे दामों से विदेशी मुद्रा आय में वृद्धि भी हुई है।
वित्त मंत्री ने कहा कि यह झटका ऐसे समय में आया है जब अर्थव्यवस्था संक्रमण के दौर से गुजर रही है, जिससे महंगाई का दबाव बढ़ रहा है और आम लोगों की जीवन लागत में तेजी आ रही है।
उन्होंने बताया कि संघर्ष शुरू होने के बाद पेट्रोल की कीमतों में 50 प्रतिशत से अधिक और डीजल में 70 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि हुई है, जिससे 2023 में शुरू किए गए आर्थिक स्थिरीकरण और विकास के प्रयासों पर असर पड़ सकता है।
ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने से अधिकांश देश प्रभावित हुए हैं और कई सरकारों ने ऊर्जा बचत तथा उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए कदम उठाए हैं।
जर्मनी की सरकार ने भी ईंधन करों में कटौती कर उपभोक्ताओं और उद्योगों को राहत देने के लिए 1.6 अरब यूरो के पैकेज की घोषणा की है। चांसलर ने कहा कि देश में मौजूदा आर्थिक समस्याओं की जड़ यही युद्ध है।
स्वीडन ने भी ईंधन करों में कमी और बिजली सब्सिडी बढ़ाने का फैसला किया है, जिसके तहत लगभग 825 मिलियन डॉलर का राहत पैकेज दिया जाएगा। वित्त मंत्री ने इसे आम लोगों को राहत देने की दिशा में अहम कदम बताया।
ब्रिटेन में भी उच्च ऊर्जा कीमतों से जूझ रहे उद्योगों को राहत देने के लिए वित्त मंत्री इस सप्ताह अपनी योजना पेश करेंगी। उन्होंने कहा कि लंबे समय से ऊर्जा लागत प्रतिस्पर्धात्मक नहीं रही है।
प्रधानमंत्री ने वैश्विक अस्थिरता का हवाला देते हुए यूरोप के साथ संबंध मजबूत करने की जरूरत पर बल दिया, जिससे देश के हित सुरक्षित रह सकें।
ईरान युद्ध के कारण दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर भी असर पड़ रहा है, जहां नीति निर्माता यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि यह आर्थिक वृद्धि और महंगाई दोनों पर किस तरह प्रभाव डालेगा।
यूरोपीय केंद्रीय बैंक के उपाध्यक्ष ने कहा कि ब्याज दरों में बदलाव का निर्णय कच्चे तेल की कीमतों के असर पर निर्भर करेगा।
जापान के केंद्रीय बैंक के नीति निर्माता भी इस माह होने वाली बैठक से पहले स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और ब्याज दरों में संभावित बदलाव को लेकर सतर्क रुख अपना रहे हैं।








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