भोपाल, 08 अप्रैल 2026।
मध्य प्रदेश के किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों के कल्याण, समृद्धि और खुशहाली के लिए लगातार महत्वपूर्ण निर्णय ले रही है। वर्ष 2026 को प्रदेश में कृषक कल्याण वर्ष के रूप में घोषित किया गया है।
कृषि मंत्री कंषाना ने बताया कि इस वर्ष गेहूं उपार्जन के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपये निर्धारित किया गया है। राज्य सरकार द्वारा घोषित 40 रुपये प्रति क्विंटल के अतिरिक्त बोनस के साथ किसानों को कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल का लाभ मिलेगा।
उन्होंने बताया कि पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ खेती को प्रोत्साहित करने के लिए नरवाई प्रबंधन को मजबूत किया जा रहा है। धारा 163 के तहत नरवाई जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है और उल्लंघन पर 2,500 से 15,000 रुपये तक जुर्माना लगाने का प्रावधान है। पराली प्रबंधन यंत्रों जैसे हैप्पी सीडर और सुपर सीडर पर किसानों को अनुदान दिया जा रहा है और उन्हें पराली न जलाने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
कृषि मंत्री ने रबी विपणन वर्ष 2026 में सरसों उत्पादक किसानों के लिए भावांतर भुगतान योजना लागू होने की जानकारी दी। इसके तहत न्यूनतम समर्थन मूल्य 5950 रुपये प्रति क्विंटल है और बाजार मूल्य और समर्थन मूल्य के अंतर की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में दी जाएगी। वहीं, उड़द की सरकारी खरीद पर 600 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस लागू किया गया है। न्यूनतम समर्थन मूल्य 7800 रुपये होने के कारण किसानों को 8400 रुपये प्रति क्विंटल का लाभ मिलेगा।
कृषि मंत्री ने बताया कि मध्यप्रदेश में सिंचाई का क्षेत्र लगभग 55 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है और राज्य सरकार का लक्ष्य इसे 100 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाना है। पीएम कुसुम योजना के तहत किसानों को सोलर पंप लगाने पर 90 प्रतिशत तक की सब्सिडी मिल रही है।
मंत्री ने कहा कि दुग्ध उत्पादन को बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री डेयरी प्लस कार्यक्रम के माध्यम से प्रयास किए जा रहे हैं और कृषि विज्ञान केन्द्रों से किसानों को आधुनिक तकनीक, उन्नत बीज और कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके अलावा, सेटेलाइट और ड्रोन सर्वे द्वारा फसलों की निगरानी की जा रही है और फूड प्रोसेसिंग यूनिट का विस्तार तथा मोटे अनाज के उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश में जैविक और प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए भी कई कदम उठाए जा रहे हैं।









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