नई दिल्ली, 13 अप्रैल।
देश की दवा एवं औषधि क्षेत्र से जुड़ी प्रमुख वैश्विक पहल ‘इंडिया फार्मा 2026’ का नौवां संस्करण सोमवार को नई दिल्ली में प्रारंभ हुआ, जिसमें दुनिया भर के विशेषज्ञ और हितधारक भारत के फार्मा सेक्टर के भविष्य को नवाचार, आत्मनिर्भरता और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाने पर चर्चा के लिए एकत्र हुए।
यह दो दिवसीय सम्मेलन रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के औषधि विभाग द्वारा भारतीय उद्योग परिसंघ और भारतीय फार्मास्यूटिकल एलायंस के सहयोग से आयोजित किया गया है, जिसमें दवा खोज में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अगली पीढ़ी की तकनीकों और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने जैसे विषयों पर फोकस किया जा रहा है।
उद्घाटन सत्र को वर्चुअल रूप से संबोधित करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा ने कहा कि भारत जैविक दवाओं, बायोसिमिलर्स और विशेष औषधियों के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की ओर अग्रसर है, और सस्ती जेनेरिक दवाओं के कारण पहले ही देश को ‘विश्व की फार्मेसी’ के रूप में पहचान मिल चुकी है, जबकि उन्नत चिकित्सा के क्षेत्र में नए अवसर सामने आ रहे हैं।
उन्होंने सरकार की नवाचार आधारित नीतियों का उल्लेख करते हुए बताया कि 10,000 करोड़ रुपये की बायोफार्मा शक्ति योजना जैव औषधि अनुसंधान को मजबूती दे रही है, साथ ही उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना और बल्क ड्रग पार्क जैसी पहल घरेलू निर्माण और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बना रही हैं।
नड्डा ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना का विस्तार देशभर में सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कर रहा है, जिससे आम नागरिकों को बड़ा लाभ मिल रहा है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि भारत अब वैश्विक जेनेरिक दवा नेतृत्व से आगे बढ़कर बायोफार्मा नवाचार केंद्र के रूप में उभर रहा है, जहां वैश्विक जेनेरिक दवाओं का लगभग 20 प्रतिशत और टीका मांग का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा भारत पूरा कर रहा है।
उन्होंने कहा कि 2030 तक बायोसिमिलर बाजार 75 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना है और वैश्विक दवा बाजार में नवाचार आधारित दवाओं की हिस्सेदारी 87 प्रतिशत है, ऐसे में भारत को नवाचार और उद्योग-अकादमिक सहयोग पर और अधिक ध्यान देना होगा।
पटेल ने दवा खोज में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की बढ़ती भूमिका पर भी जोर दिया और एनआईपीईआर तथा आईआईटी जैसे संस्थानों के माध्यम से कुशल मानव संसाधन विकसित करने की आवश्यकता बताई।
औषधि विभाग के सचिव मनोज जोशी ने नवाचार की गति तेज करने, स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने और क्लिनिकल परीक्षण व अनुसंधान ढांचे को सशक्त बनाने पर बल दिया, साथ ही उद्योग और सरकार के बीच बेहतर सहयोग की आवश्यकता बताई।
स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने कहा कि नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाने और शोध को सुगम करने की दिशा में प्रयास जारी हैं, जिससे भारत ‘विश्व की फार्मेसी’ से आगे बढ़कर ‘विश्व का नवप्रवर्तक’ बन सके।
उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भी भारत के मजबूत फार्मा आधार को रेखांकित किया और बताया कि देश में 3,000 से अधिक कंपनियां और 10,500 से ज्यादा उत्पादन इकाइयां हैं, जिनमें अमेरिका के बाहर सर्वाधिक यूएसएफडीए मानक वाली इकाइयां शामिल हैं।
मंत्रालय ने बताया कि इस सम्मेलन में नीति ढांचे, एआई आधारित दवा खोज, अगली पीढ़ी की तकनीक और वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की रणनीतियों पर व्यापक विचार-विमर्श होगा, जिससे भारत को वैश्विक स्वास्थ्य नेतृत्व की दिशा में और मजबूती मिलेगी।







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