ट्रैफिक व परिवहन
19 May, 2026

राजस्थान जुड़ा ‘नमो भारत’ नेटवर्क से, अलवर-नई दिल्ली आरआरटीएस कॉरिडोर को मिली मंजूरी

राजस्थान के ‘नमो भारत’ नेटवर्क में शामिल होने के बाद अलवर-नई दिल्ली आरआरटीएस कॉरिडोर को मंजूरी मिल गई है जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, औद्योगिक विकास और तेज परिवहन को नई गति मिलेगी।

नई दिल्ली, 19 मई।

राजस्थान ने ‘नमो भारत’ नेटवर्क में शामिल होने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है, जिसके तहत रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम के माध्यम से अलवर को नई दिल्ली से जोड़ने वाली तेज, सुरक्षित और आधुनिक परिवहन सुविधा को नई गति मिल गई है, जबकि राजस्थान और हरियाणा सरकारों के बीच सहमति बनने के बाद इस परियोजना को औपचारिक रूप से आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है।

इस योजना के तहत नई दिल्ली के सराय काले खां से शुरू होकर दिल्ली-गुरुग्राम-एसएनबी-अलवर कॉरिडोर मुनिरका, एयरोसिटी, गुरुग्राम और बावल होते हुए खैरथल और अलवर तक पहुंचेगा, वहीं एसएनबी से आगे नीमराना और बहरोड़ होते हुए सोतानाला तक एक अतिरिक्त खंड विकसित किया जाएगा, जिससे पूरे क्षेत्र में कनेक्टिविटी और मजबूत होगी।

अधिकारियों के अनुसार यह परियोजना राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों जैसे भिवाड़ी और नीमराना को सीधा लाभ पहुंचाएगी, साथ ही इससे निवेश, रोजगार और आर्थिक विकास के नए अवसर भी उत्पन्न होंगे, जबकि आधुनिक परिवहन ढांचे के माध्यम से क्षेत्रीय विकास को गति देने की योजना पर काम जारी है।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की एकीकृत परिवहन योजना के तहत प्रमुख शहरों को उच्च गति वाले परिवहन नेटवर्क से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, जिसमें दिल्ली-गाजियाबाद-Meerut, दिल्ली-गुरुग्राम-एसएनबी-अलवर और दिल्ली-पानीपत-कर्नाल कॉरिडोर को प्राथमिक चरण में विकसित किया जा रहा है, जिनमें से दिल्ली-गाजियाबाद-Meerut कॉरिडोर पहले ही शुरू किया जा चुका है।

यह प्रस्तावित नेटवर्क 196 किलोमीटर क्षेत्र में फैला होगा और इसमें 22 प्रमुख स्टेशन शामिल होंगे, जबकि राजस्थान में यह परियोजना 91 किलोमीटर तक विस्तारित होगी और छह नए स्टेशन प्रस्तावित किए गए हैं, साथ ही इसे अत्याधुनिक तकनीक और 160 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलने वाली ट्रेनों के लिए तैयार किया जा रहा है।

सभी कॉरिडोर को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि यात्री बिना किसी बाधा के एक नेटवर्क से दूसरे नेटवर्क में यात्रा कर सकें, जबकि इनका मुख्य इंटरचेंज केंद्र दिल्ली का सराय काले खां स्टेशन होगा, जो पूरे सिस्टम का प्रमुख हब बनेगा और विभिन्न रूटों को आपस में जोड़ेगा।

यह रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम एक उन्नत सार्वजनिक परिवहन मॉडल है, जिसे विशेष रूप से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लिए विकसित किया गया है, जिसमें ट्रेनें अलग से बनाए गए एलिवेटेड कॉरिडोर पर चलेंगी और सड़क यातायात से बिना बाधा के तेज और सुगम यात्रा सुनिश्चित करेंगी, साथ ही इसे रेलवे स्टेशन, बस टर्मिनल, हवाई अड्डों और मेट्रो नेटवर्क से भी जोड़ा जाएगा।

यह प्रणाली मेट्रो सेवाओं की तुलना में लगभग तीन गुना तेज गति से संचालन करने में सक्षम होगी और इसका उद्देश्य नजदीकी शहरों को सुरक्षित, तेज और प्रभावी रूप से जोड़ना है, जिससे राजस्थान और हरियाणा के औद्योगिक क्षेत्रों में परिवहन और विकास की नई संभावनाएं उत्पन्न होंगी।

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