रांची 08 मई।
झारखंड उच्च न्यायालय में शुक्रवार को रांची के खादगड़ा शिव दुर्गा मंदिर रोड स्थित मुंडारी प्रकृति की भूमि पर बने 12 मकानों को गिराए जाने से जुड़े मामले की सुनवाई हुई। यह मामला महादेव उरांव द्वारा दायर अवमानना याचिका से संबंधित है, जिस पर अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए प्रार्थी के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी कर दिया है।
सुनवाई न्यायमूर्ति राजेश शंकर की अदालत में हुई। अदालत के निर्देश पर प्रतिवादी पक्ष यानी पीड़ितों की ओर से दायर हस्तक्षेप याचिका पर प्रार्थी महादेव उरांव ने अपना जवाब प्रस्तुत किया। जवाब पर अदालत संतुष्ट नहीं हुई और कहा कि शपथ पत्र में गलत तथ्य पेश किए गए हैं तथा न्यायालय को गुमराह करने का प्रयास किया गया है।
अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि हस्तक्षेपकर्ताओं से कथित धन लेन-देन की जानकारी को छिपाया गया है। इस पर अदालत ने महादेव उरांव से पूछा कि क्यों न उनके विरुद्ध अवमानना सहित अन्य आपराधिक कानूनों के तहत कार्रवाई की जाए और उनसे विस्तृत जवाब मांगा है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने हस्तक्षेपकर्ताओं को दी गई अंतरिम राहत को अगले आदेश तक जारी रखने का निर्देश दिया। इसके तहत उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की पीड़क कार्रवाई पर रोक बनी रहेगी। मामले की अगली सुनवाई 19 जून को तय की गई है। हस्तक्षेपकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता गौरव राज ने पक्ष रखा।
पिछली सुनवाई में हेहल अंचल कार्यालय ने अदालत में अपना जवाब दाखिल किया था, जिसमें बताया गया था कि हस्तक्षेपकर्ताओं को तीन बार नोटिस दिया गया, लेकिन आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए। इसके बाद संरचनाओं को हटाने की कार्रवाई शुरू की गई थी, जिस पर अदालत ने नाराजगी जताई थी और केवल कब्जा हटाने के बजाय मकानों को ढहाने के औचित्य पर सवाल उठाया था।
अदालत ने यह भी कहा था कि रिट याचिका दायर करते समय एग्रीमेंट और लेन-देन से जुड़ी जानकारी क्यों छिपाई गई। यह पूरा मामला सुखदेवनगर क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से जुड़ा हुआ है।
जिला प्रशासन ने खादगड़ा शिव दुर्गा मंदिर रोड स्थित भूमि पर बने 12 मकानों को हटाने का आदेश जारी किया था, जिसके बाद बुलडोजर कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई का स्थानीय लोगों ने विरोध किया और इसे अनुचित बताया।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने प्रति कट्ठा 5.25 लाख रुपये की दर से जमीन खरीदी थी और लंबे समय से वहां निवास कर रहे हैं। उनका यह भी कहना है कि 38.25 डिसमिल भूमि के लिए उन्होंने लगभग 1 करोड़ 8 लाख 93 हजार 750 रुपये का भुगतान किया, लेकिन अब उन्हें बेदखल किया जा रहा है।






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