मध्य प्रदेश
13 Apr, 2026

सेवा ही सर्वोच्च साधना, अमरकंटक से मुख्यमंत्री का पंच परिवर्तन संदेश

अमरकंटक में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने समाज सेवा, पर्यावरण संरक्षण और पंच परिवर्तन के माध्यम से जीवन मूल्यों को अपनाने का संदेश देते हुए स्व. माथुर को श्रद्धांजलि अर्पित की।

अमरकंटक, 13 अप्रैल।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जब कोई व्यक्ति अपना संपूर्ण जीवन समाज के कल्याण के लिए समर्पित कर देता है, तब वह केवल व्यक्ति नहीं रह जाता, बल्कि एक विचार के रूप में स्थापित हो जाता है। स्व. भगवत शरण माथुर का जीवन भी इसी का उदाहरण है, जिन्होंने सेवा को ही सच्ची साधना मानते हुए समाज के लिए कार्य किया।

उन्होंने कहा कि स्व. माथुर ने अपने व्यक्तिगत सुखों का त्याग कर समाज के कमजोर वर्ग के उत्थान के लिए निरंतर प्रयास किए, जो आज भी लोगों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि उनका मूल निवास राजगढ़ जिले के सीका गांव में था और उन्होंने शिक्षा व सामाजिक पिछड़ेपन को दूर करने के लिए कई पहल कीं।

मुख्यमंत्री सोमवार को अमरकंटक स्थित श्री नर्मदे हर सेवा न्यास में आयोजित विचार गोष्ठी एवं श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने स्व. माथुर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि अमरकंटक पवित्र स्थल है, जहां से मां नर्मदा, सोन और जोहिला नदियां प्रवाहित होती हैं और यह स्थान विशेष आस्था का केंद्र है।

उन्होंने कहा कि स्व. माथुर ने जीवन के अंतिम क्षण तक नर्मदा माता और देश की सेवा की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने गौशाला के लिए अनुदान, कथा-प्रवचन हेतु पर्यावरण अनुकूल भवन निर्माण और जल स्रोतों के संरक्षण के लिए अभियान चलाने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने बताया कि गुढ़ी पड़वा से गंगा दशहरा तक प्रदेश में जल स्रोतों के संरक्षण और जीर्णोद्धार का कार्य किया जाएगा। साथ ही नर्मदा परिक्रमा मार्ग के विकास और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं बढ़ाने का संकल्प भी दोहराया गया।

विचार गोष्ठी में ‘पंच परिवर्तन’ विषय पर अपने विचार रखते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज में समरसता, परिवार में संस्कार, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी और नागरिक कर्तव्यों का पालन जैसे पांच मूल तत्वों को अपनाना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज को एकजुट रखने और नई पीढ़ी में संस्कार विकसित करने की जरूरत है। परिवार के साथ समय बिताना, बच्चों को महापुरुषों के जीवन से परिचित कराना और राष्ट्र निर्माण की भावना विकसित करना जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता बढ़ानी होगी, क्योंकि बदलते मौसम और प्राकृतिक चुनौतियां इसके संकेत हैं। उन्होंने स्वदेशी अपनाने और देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी आगे बढ़ने की बात कही।

कार्यक्रम में कई जनप्रतिनिधि, संत-महंत और समाजसेवी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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