मुजफ्फरपुर, 15 मई।
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले की विश्वप्रसिद्ध शाही लीची का इंतजार अब समाप्त हो गया है और यह बाजारों में पहुंचने लगी है। अपनी विशिष्ट मिठास, आकर्षक सुगंध और पतले छिलके के कारण देश-विदेश में पहचान बनाने वाली यह लीची अब स्थानीय मंडियों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है।
शहर के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों जैसे स्टेशन रोड और क्लब रोड समेत कई बाजारों में लाल रंग की ताजगी भरी लीची ग्राहकों का ध्यान आकर्षित कर रही है। शुरुआती सीजन होने के कारण फिलहाल इसकी आवक सीमित है, जिसके चलते बाजार में इसकी कीमत लगभग 400 रुपये प्रति सैकड़ा तक पहुंच गई है।
स्थानीय व्यापारियों के अनुसार बागानों से लीची की तुड़ाई अभी बहुत सीमित स्तर पर हो रही है। कम आपूर्ति और बढ़ती मांग के कारण शुरुआती दौर में कीमतें ऊंची बनी हुई हैं और खरीदारों की भीड़ भी लगातार देखने को मिल रही है। रोहुआ क्षेत्र के एक व्यवसायी के अनुसार इस लीची की लोकप्रियता इतनी अधिक है कि शुरुआती खेप आते ही लोग अधिक कीमत पर भी इसे खरीदने के लिए तैयार रहते हैं, जिसके कारण इसकी बिक्री तेजी से हो रही है।
मई के अंतिम सप्ताह और जून की शुरुआत में स्थिति में बदलाव आने की उम्मीद है, जब बड़े पैमाने पर तुड़ाई शुरू होगी और बाजार में लीची की आवक बढ़ जाएगी। व्यापारियों का अनुमान है कि इस अवधि में आपूर्ति बढ़ने से कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट आएगी और यह आम उपभोक्ताओं के लिए अधिक सुलभ हो जाएगी।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान में लीची शुरुआती रंग अवस्था में है, लेकिन मई के अंत तक तेज धूप और अनुकूल मौसम के कारण यह पूरी तरह पककर तैयार हो जाएगी। इसके बाद इसके रस और मिठास में और वृद्धि होगी तथा इसकी सुगंध भी अधिक प्रखर हो जाएगी, जिससे इसकी मांग राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और बढ़ेगी।
यह उल्लेखनीय है कि मुजफ्फरपुर की शाही लीची को भौगोलिक संकेतक का दर्जा प्राप्त है, जिसके कारण देश के प्रमुख महानगरों जैसे दिल्ली, मुंबई और कोलकाता के व्यापारी भी यहां पहुंचने लगे हैं। आने वाले समय में रेलवे और हवाई मार्ग से इसकी आपूर्ति देशभर में और तेज होने की संभावना है।




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