नई दिल्ली, 08 जून ।
देश में जन धन योजना के तहत बैंक खातों की संख्या बढ़कर 58.15 करोड़ तक पहुंच गई है तथा इन खातों में कुल जमा राशि 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गई है, जो देश में वित्तीय समावेशन की मजबूत स्थिति को दर्शाती है।
वित्त मंत्रालय की ओर से जारी तथ्य पत्र में बताया गया है कि पिछले 12 वर्षों में केंद्र सरकार की पहलों से गरीबों तक बैंकिंग, स्वास्थ्य, आवास, स्वच्छ ईंधन, नल जल और सामाजिक सुरक्षा जैसी सुविधाओं की पहुंच काफी बढ़ी है।
जानकारी के अनुसार, जन धन खातों में से लगभग 56 प्रतिशत खाते महिलाओं के नाम पर हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि ग्रामीण और महिला सशक्तिकरण में इस योजना की बड़ी भूमिका रही है।
सरकार ने जन धन, आधार और मोबाइल आधारित व्यवस्था यानी जेएएम ट्रिनिटी के माध्यम से योजनाओं के लाभ सीधे पात्र लोगों तक पहुंचाने में सफलता हासिल की है, जिससे वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ी है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में आयुष्मान भारत योजना के तहत अब तक 44 करोड़ से अधिक कार्ड जारी किए जा चुके हैं, जिनके माध्यम से 12 करोड़ परिवारों को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर उपलब्ध कराया जा रहा है।
इसके साथ ही इस योजना का विस्तार करते हुए वरिष्ठ नागरिकों, आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और उनके परिवारों को भी शामिल किया गया है, जिससे करोड़ों लोगों को लाभ मिला है।
ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल सुविधा के लिए जल जीवन मिशन के तहत 15.7 करोड़ नल कनेक्शन दिए गए हैं, जबकि स्वच्छता के लिए 12 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण किया गया है।
इसी तरह सौभाग्य योजना के अंतर्गत 2.9 करोड़ से अधिक घरों तक बिजली पहुंचाई गई है, जिससे जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
सरकार ने गरीब परिवारों के लिए रसोई गैस उपलब्ध कराने हेतु 10 करोड़ एलपीजी कनेक्शन भी प्रदान किए हैं, वहीं प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 4 करोड़ पक्के मकानों का निर्माण पूरा किया गया है।
जल जीवन मिशन को अब सेवा आधारित प्रणाली के रूप में और मजबूत करने के लिए इसकी लागत बढ़ाकर 8.69 लाख करोड़ रुपये कर दी गई है, जिसमें केंद्र सरकार की हिस्सेदारी भी बढ़ाई गई है।














