नई दिल्ली, 17 जुलाई।
राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की ओर से नई दिल्ली के विज्ञान भवन में शुक्रवार को कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 (पॉश एक्ट) पर दो दिवसीय राष्ट्रीय जागरूकता कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। इसमें वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, कानूनी विशेषज्ञों, आंतरिक एवं स्थानीय समितियों के प्रतिनिधियों तथा विभिन्न संस्थाओं के सदस्यों ने भाग लिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि महिलाओं के नेतृत्व में विकास के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और समावेशी कार्यस्थल सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक महिला को बिना किसी भय के सम्मानपूर्वक कार्य करने का अधिकार है और सुरक्षित कार्यस्थल उपलब्ध कराना सरकार, नियोक्ताओं तथा संस्थानों की साझा जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय पॉश एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। इन पहलों से संस्थानों को अपनी कानूनी जिम्मेदारियों को समझने और कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम तथा शिकायतों के प्रभावी निवारण के लिए बेहतर व्यवस्था विकसित करने में सहायता मिल रही है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बदलते कार्यस्थलों के साथ नई चुनौतियां भी सामने आई हैं। ऐसे में शिकायतों के समयबद्ध निपटारे, निष्पक्ष जांच, गोपनीयता बनाए रखने और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन सुनिश्चित करने के लिए संस्थागत तंत्र को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
उन्होंने 'शी-बॉक्स' पोर्टल को शिकायतों के समयबद्ध समाधान का प्रभावी डिजिटल मंच बताते हुए कहा कि यह महिलाओं की सुरक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।
कार्यक्रम के दौरान अन्नपूर्णा देवी ने राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा तैयार पॉश एक्ट के तहत आंतरिक एवं स्थानीय समितियों के लिए जांच प्रक्रियाओं संबंधी पुस्तिका का विमोचन भी किया। यह पुस्तिका निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने में मार्गदर्शिका का कार्य करेगी।
कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय महिला आयोग के सदस्य सचिव सुदीप जैन के स्वागत भाषण से हुई। आयोग की अध्यक्ष विजया राहटकर ने उद्घाटन संबोधन दिया। इसके बाद आयोजित तकनीकी सत्र में पॉश एक्ट के प्रमुख प्रावधानों, शिकायत निस्तारण प्रक्रिया, शिकायतकर्ताओं और प्रतिवादियों के अधिकारों तथा जांच प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई।














