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प्रशासनिक खबरें
28 Jul, 2026

भोपाल में दुष्कर्म-पॉक्सो मामलों में धाराएं लगाने में पुलिस की चूक

रोजाना दर्ज मामलों की विशेष समीक्षा कर त्रुटियां तुरंत सुधारने और अधिकारियों को प्रशिक्षण देने के निर्देश

भोपाल, 28 जुलाई।

मध्य प्रदेश में दुष्कर्म और पॉक्सो मामलों में कानूनी धाराएं लगाने में पुलिस स्तर पर गंभीर कमियां सामने आई हैं। पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) की समीक्षा में पाया गया है कि कई मामलों में जरूरी धाराएं नहीं लगाई गईं, वहीं कुछ प्रकरणों में ऐसी धाराएं भी जोड़ दी गईं, जिनकी आवश्यकता नहीं थी। इससे अदालत में अभियोजन पक्ष कमजोर होने की आशंका बनी रहती है।

समीक्षा के दौरान सामने आया कि भोपाल के एक थाने में दर्ज दुष्कर्म मामले में पुलिस ने दुष्कर्म की धारा तो लगाई, लेकिन पीड़िता की शिकायत के बावजूद मारपीट की धारा शामिल नहीं की गई। इसी तरह पॉक्सो मामलों में पीड़िता की उम्र के आधार पर लागू होने वाली भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं का सही उपयोग नहीं किए जाने के मामले भी सामने आए हैं।

मामलों की लगातार समीक्षा के लिए पुलिस मुख्यालय ने एक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में तीन सदस्यीय समीक्षा टीम गठित की है। यह टीम रोजाना दर्ज होने वाले मामलों में लगाई गई धाराओं की जांच कर रही है। प्रदेश में प्रतिदिन औसतन 15 से 20 दुष्कर्म और संबंधित मामले दर्ज होते हैं। समीक्षा के दौरान मिलने वाली कमियों को विवेचना स्तर पर ही सुधारने के निर्देश दिए जा रहे हैं।

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (महिला सुरक्षा) अनिल कुमार ने बताया कि जांच के दौरान ही त्रुटियों को ठीक कराया जा रहा है, ताकि न्यायालय में अभियोजन पक्ष कमजोर न हो। इसके साथ ही पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को सही धाराओं के प्रयोग को लेकर प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।

पुलिस मुख्यालय समय-समय पर भोपाल और इंदौर पुलिस आयुक्तों तथा सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को इन कमियों के संबंध में निर्देश भेज रहा है। 15 जुलाई को भी इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। खास बात यह है कि जिन कमियों को अब पुलिस मुख्यालय की समीक्षा में चिन्हित किया गया है, वे पहले जिला स्तर की समीक्षा में सामने नहीं आ सकी थीं।

समीक्षा में सामने आई प्रमुख कमियों में पॉक्सो मामलों में उम्र के अनुसार धाराओं का सही उपयोग नहीं होना शामिल है। 16 वर्ष से कम उम्र की पीड़िता के मामले में बीएनएस धारा 65(1) और 12 वर्ष से कम आयु होने पर धारा 65(2) लगाने का प्रावधान है, लेकिन कई मामलों में इसका पालन नहीं किया गया।

इसके अलावा शादी का झांसा या झूठे वादे के आधार पर बनाए गए संबंधों के मामलों में बीएनएस धारा 69 लागू होती है, लेकिन कुछ मामलों में इसके साथ अनावश्यक रूप से दुष्कर्म की धारा 64 भी जोड़ दी गई।

मानसिक रूप से विक्षिप्त पीड़िता से जुड़े मामलों में दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम की धारा 92(घ) का समावेश नहीं किए जाने की कमियां भी सामने आई हैं। वहीं नाबालिग पीड़िता के गर्भवती होने की स्थिति में पॉक्सो एक्ट की धारा 5(जे-ii) लगाने में भी लापरवाही पाई गई है।

पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि इन कमियों को दूर करने के लिए निगरानी और प्रशिक्षण की प्रक्रिया लगातार जारी रहेगी, ताकि संवेदनशील मामलों में कानूनी कार्रवाई अधिक प्रभावी और मजबूत बनाई जा सके।

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