जबलपुर, 30 जुलाई।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर ने गुरुवार को मानव तस्करी और जबरन श्रम के विषय पर पैरा लीगल वॉलंटियर्स के लिए ऑनलाइन कार्यशाला आयोजित की। यह आयोजन मानव तस्करी के खिलाफ विश्व दिवस के अवसर पर किया गया।
प्रधान जिला न्यायाधीश और अध्यक्ष कृष्णमूर्ति मिश्रा के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यशाला को इंटरनेशनल जस्टिस मिशन के प्रतिनिधि मुकेश मानसिंह राजपूत और जबलपुर के जिला विधिक सहायता अधिकारी बी. डी. दीक्षित ने संबोधित किया।
मुकेश मानसिंह राजपूत ने कार्यशाला में मानव तस्करी, बंधुआ मजदूरी, बाल तस्करी और शोषण के विभिन्न रूपों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि तस्कर किस तरह लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं और पीड़ितों को किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने समय पर बचाव, पुनर्वास और कानून प्रवर्तन एजेंसियों, नागरिक समाज संगठनों तथा विधिक सेवा संस्थानों के बीच समन्वय की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला।
जिला विधिक सहायता अधिकारी बी. डी. दीक्षित ने पीड़ितों के लिए उपलब्ध संवैधानिक और कानूनी सुरक्षा उपायों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संविधान का अनुच्छेद 23 मानव तस्करी, बेगार और जबरन श्रम जैसे कृत्यों पर रोक लगाता है और इन्हें कानून के तहत दंडनीय बनाया गया है।
उन्होंने भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 143 के प्रावधानों के बारे में भी जानकारी दी, जिसमें शोषण के उद्देश्य से मानव तस्करी करने वालों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान है।
दीक्षित ने कहा कि पैरा लीगल वॉलंटियर्स जागरूकता फैलाने, कमजोर वर्ग के लोगों की पहचान करने और उन्हें मुफ्त कानूनी सहायता उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि इनके माध्यम से पीड़ितों को विधिक सेवा प्राधिकरणों के जरिए समय पर सहायता, सुरक्षा और पुनर्वास दिलाने में मदद मिल सकती है।
कार्यशाला का समापन संवादात्मक सत्र के साथ हुआ। इसमें पैरा लीगल वॉलंटियर्स ने मानव तस्करी और जबरन श्रम के खिलाफ सक्रिय भूमिका निभाने तथा लोगों के संवैधानिक अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए काम करने का संकल्प लिया।

















