विश्व, 15 सितंबर।
हर दिन दुनिया में चार सौ दो अरब जीबी डेटा पैदा हो रहा है। हर फोटो, वीडियो, भुगतान और सीसीटीवी फुटेज डेटा है। डेटा विस्फोट के साथ स्टोरेज संकट भी बढ़ रहा है। बढ़ते डेटा बोझ को अब डीएनए में कैद करने की दिशा में काम हो रहा है, क्योंकि पारंपरिक हार्ड डिस्क अपनी सीमा पर पहुंच रही हैं।
आज एक सामान्य हार्ड डिस्क 22 टेराबाइट तक स्टोर कर सकती है। इतने डेटा के लिए विशाल ढांचे की जरूरत होगी। इसलिए वैज्ञानिक हार्ड डिस्क का विकल्प जीव विज्ञान में खोज रहे हैं।
डीएनए में 21.5 करोड़ जीबी डेटा प्रति ग्राम तक स्टोर करने की क्षमता प्रदर्शित की जा चुकी है। इसमें चार कोड होते हैं - ए, टी, सी और जी। जैसे कंप्यूटर में शून्य और एक होते हैं। वैज्ञानिकों ने इसी कोड को स्टोरेज की भाषा बना दिया है। 2017 में डीएनए फाउंटेन प्रयोग में 215 पेटाबाइट यानी 21.5 करोड़ जीबी डेटा प्रति ग्राम स्टोर करने में सफलता मिली थी।
डीएनए की ताकत उसका घनत्व और टिकाऊपन है। हार्ड डिस्क कुछ वर्षों में खराब हो सकती है, जबकि सही परिस्थितियों में डीएनए सैकड़ों वर्षों तक सुरक्षित रहता है। डेटा लिखने के बाद उसे सुरक्षित रखने के लिए लगातार बिजली की जरूरत नहीं होती।
हालांकि, चुनौतियां बड़ी हैं। डीएनए में डेटा लिखना महंगा है, पढ़ने की गति धीमी है और दोबारा लिखना कठिन है। इसलिए यह राष्ट्रीय अभिलेख, ऐतिहासिक दस्तावेज और वैज्ञानिक डेटा जैसे दीर्घकालीन भंडारण के लिए अधिक उपयुक्त है।
भविष्य में तेज डेटा के लिए एसएसडी और हार्ड डिस्क रहेंगी, जबकि लंबे समय तक सुरक्षित रखने वाला डेटा डीएनए में जा सकता है। जिस दिन यह तकनीक सस्ती हुई, उस दिन स्टोरेज की दुनिया बदल जाएगी।















