मध्य प्रदेश, 17 सितंबर।
मध्यप्रदेश की राजनीति में सितंबर का महीना हमेशा से महत्वपूर्ण रहा है, पर इस बार का सितंबर कुछ अलग रंग दिखाने वाला है। एक ही सप्ताह में तीन बड़े चेहरे एक ही अंचल में जुट रहे हैं - भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी। तीनों का केंद्र है मालवा और मालवा की दो नगरी इंदौर और उज्जैन। इसे महज संयोग नहीं, बल्कि सियासी प्रयोग कहा जा रहा है।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन 17 सितंबर को मध्यप्रदेश आएंगे। उनके लिए इंदौर और उज्जैन में तीन कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। इनमें स्वामित्व योजना की शुरुआत, गांधी सागर में चीतों को छोड़ना और उज्जैन में 25 लाख दीपों का दीपोत्सव शामिल है। इसी दौरान आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत 17 और 18 सितंबर को उज्जैन में रहेंगे। वे स्वयंसेवकों को संबोधित करने के साथ 18 सितंबर को युवा धर्म संसद में युवाओं से संवाद करेंगे। नितिन नवीन और भागवत की मुलाकात की संभावना भी है।
19 सितंबर को इंदौर में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी का 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम प्रस्तावित है। भाजपा और आरएसएस का युवाओं से संवाद इससे पहले है। इसके लिए कई स्थानों पर मंथन चल रहा है। इस पूरे घटनाक्रम को मध्यप्रदेश की राजनीति में हलचल मचाने वाला माना जा रहा है।
सियासत का भूगोल मालवा को मध्यप्रदेश की राजनीति का दिल कहा जाता है। यहां से जो हवा बहती है, वह भोपाल तक पहुंचती है। भाजपा ने इसीलिए मालवा को चुना है। उज्जैन में महाकाल लोक परिसर और क्षिप्रा के घाट, इंदौर में स्वच्छता की राजधानी का संदेश और मंदसौर में गांधी सागर अभयारण्य में चीतों की वापसी - तीनों ही घटनाएं प्रतीकात्मक हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने पर उज्जैन में क्षिप्रा के घाटों एवं महाकाल लोक परिसर में 25 लाख दीये जलाए जाएंगे। यह सिर्फ दीपोत्सव नहीं है, यह सेवा के 25 वर्ष का उत्सव है। भाजपा इसे सेवा संकल्प अभियान के रूप में प्रस्तुत कर रही है। प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर मंदसौर में गांधी सागर अभयारण्य में चीतों को छोड़कर सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत होगी। साथ ही आवासीय भूमि की फ्री रजिस्ट्री योजना का शुभारंभ भी हो सकता है। स्वामित्व योजना के माध्यम से ग्रामीण आबादी को अधिकार देना भाजपा का बड़ा दांव है।
डॉ. मोहन भागवत का उज्जैन प्रवास केवल औपचारिक नहीं है। 18 सितंबर को युवा धर्म संसद में युवाओं से संवाद होना है। संघ लंबे समय से युवाओं से सीधे जुड़ने की कोशिश कर रहा है। धर्म संसद शब्द ही बताता है कि यह केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक आयोजन है। आज का युवा धर्म को कर्मकांड नहीं, बल्कि जीवनशैली के रूप में देखता है। भागवत का संवाद इसी जीवनशैली पर केंद्रित होगा। संघ की चिंता यह रही है कि युवा सोशल मीडिया के भ्रम में न उलझे, वह अपनी जड़ों से जुड़े। उज्जैन जैसी धर्मनगरी में युवाओं से संवाद का अर्थ है कि धर्म को आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत किया जाए। यह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे के ठीक पहले हो रहा है। इससे संकेत मिलता है कि संगठन और विचार परिवार एक ही दिशा में काम कर रहे हैं।
19 सितंबर को राहुल गांधी इंदौर में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में शामिल होंगे। कांग्रेस की रणनीति स्पष्ट है। जहां भाजपा और संघ धर्म, सेवा और संगठन के माध्यम से युवाओं तक पहुंच रहे हैं, वहीं कांग्रेस सवाल और संवाद के माध्यम से युवाओं तक पहुंचना चाहती है। इंदौर मध्यप्रदेश का शिक्षा हब बन चुका है। यहां लाखों छात्र पढ़ते हैं, यह कोचिंग हब है और आईटी हब बन रहा है। ऐसे में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के माध्यम से राहुल गांधी युवाओं के मन की बात सुनना चाहते हैं। रोजगार, शिक्षा और भविष्य को लेकर युवाओं में जो बेचैनी है, उसे कांग्रेस अपना मुद्दा बनाना चाहती है।
भाजपा और आरएसएस का युवाओं से संवाद इससे पहले हो रहा है। इसका अर्थ है कि कांग्रेस के आने से पहले ही भाजपा अपना नैरेटिव सेट कर देगी। राहुल गांधी के लिए चुनौती यह है कि वह मालवा की धरती पर क्या नया कहते हैं, क्योंकि यहां मैदान अभी तक नहीं मिला है। इससे प्रशासनिक अड़चन या सियासी संदेश, दोनों की चर्चा तेज है।
भाजपा के तीन कार्यक्रमों को ध्यान से देखिए - 25 लाख दीप, चीते और फ्री रजिस्ट्री। तीनों ही अलग-अलग वर्ग को संबोधित करते हैं। दीपोत्सव आस्था का प्रतीक है। महाकाल लोक और क्षिप्रा के घाट पर दीप जलाना उज्जैन के मतदाता को सीधे जोड़ता है। भाजपा विकास के साथ विरासत को भी लेकर चल रही है।
चीता पर्यावरण और वैश्विक छवि का प्रतीक है। गांधी सागर अभयारण्य में चीतों को छोड़ना कूनो के बाद दूसरा बड़ा प्रयोग है। यह मंदसौर-नीमच अंचल के लिए पर्यटन का नया द्वार खोलेगा और युवाओं को रोजगार का नया सपना दिखाएगा। फ्री रजिस्ट्री गरीब और मध्यम वर्ग के लिए सीधा आर्थिक लाभ है। स्वामित्व योजना के तहत आवासीय भूमि की रजिस्ट्री फ्री करना यह संदेश देता है कि सरकार जमीन पर अधिकार दे रही है। यह भाजपा का बड़ा सामाजिक दांव है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने पर भाजपा इसे उत्सव के रूप में मना रही है। मुख्यमंत्री से लेकर कार्यकर्ता तक 25 वर्ष की सेवा यात्रा को घर-घर पहुंचाने की तैयारी में हैं। उज्जैन में 25 लाख दीये इसी यात्रा का प्रतीक हैं। हर दीया एक वर्ष नहीं, बल्कि एक संकल्प का प्रतीक है। इस बहाने भाजपा यह भी बताना चाहती है कि सेवा ही संगठन है और संगठन ही सरकार है।
सितंबर के इन तीन दौरों से मध्यप्रदेश की राजनीति में हलचल तय है। एक ही अंचल में संघ, भाजपा और कांग्रेस तीनों का युवा संवाद होना यह बताता है कि अगले चुनाव की तैयारी अभी से शुरू हो गई है। भाजपा दीप जलाकर आस्था और सेवा का संदेश देगी, संघ धर्म संसद के माध्यम से संस्कार का संदेश देगा और राहुल गांधी 'छात्रों की गूंज' के माध्यम से सवाल का संदेश देंगे। मालवा की जनता किसकी गूंज सुनती है - दीयों की, धर्म की या छात्रों की? तीनों ही गूंज मध्यप्रदेश की आने वाली राजनीति की दिशा तय करेंगी।















