भोपाल, 17 सितंबर।
भोपाल में इन दिनों अजीब दृश्य है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नगर निगम ने जो दुकानें सील की थीं, वे कोर्ट की अगली सुनवाई से पहले ही खुल गई हैं। नगर निगम ने एक अगस्त से एक सितंबर के बीच अरेरा, गुलमोहर, बावड़िया कला और रोहित नगर क्षेत्र में जिन दुकानों को सील किया था, वे फिर खुल गई हैं। 15 सितंबर को कोर्ट में अगली सुनवाई होनी है, लेकिन व्यापारियों ने विरोध स्वरूप बाजार और सील दुकानें खोल दी हैं।
यह केवल एक शहर की घटना नहीं है। यह प्रवृत्ति बनती जा रही है, जहां व्यापारी खुद को कानून से ऊपर समझने लगे हैं। तालाबंदी को घाटा बताकर निगम और कोर्ट के निर्देश की नाफरमानी खुलेआम हो रही है।
नगर निगम का दावा है कि शहर में अब तक 8,084 नोटिस जारी किए गए हैं और 190 संस्थानों का पंचनामा बनाकर उन्हें बंद कराया गया है। हालांकि, इनमें से अधिकांश के दोबारा खुलने की बात भी सामने आ रही है। शहर के सभी 62,500 व्यावसायिक संस्थानों को 30 दिन में नोटिस देने का दावा भी पूरा नहीं हुआ है।
अरेरा और आसपास के आवासीय इलाकों में चल रहे स्किन मशीन, टैटू स्टूडियो, अर्बन तोहफा, बेकरी और राजमहल होटल को सील किया गया था, जहां वर्तमान में व्यवसाय शुरू हो गया है। वहीं, छोटे कारोबारियों ने कार्रवाई के डर से शटर बंद रखे हैं। यह दोहरा मापदंड है। बड़ा व्यापारी शटर खोल रहा है, छोटा व्यापारी डर से बंद रख रहा है।
भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स ने कहा कि 15 सितंबर की सुनवाई के बाद व्यापार बंद करने का प्रयास हुआ तो पूरा भोपाल बंद करवाया जाएगा। यह व्यापारिक एकता नहीं, प्रशासनिक चुनौती है।
तालाबंदी से व्यापारियों को घाटा हुआ है, लेकिन क्या घाटे की भरपाई कानून तोड़कर होगी? आवासीय क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधि से पार्किंग, शोर, भीड़ और सुरक्षा का संकट बढ़ता है। नगर निगम को ट्रेड लाइसेंस की प्रक्रिया पारदर्शी करनी चाहिए और आवासीय तथा व्यावसायिक क्षेत्रों का स्पष्ट सीमांकन करना चाहिए। व्यापार नियम से चलेगा, धमकी से नहीं।















