भोपाल, 18 सितंबर।
ग्वालियर और भोपाल में जो मामला सामने आया है, वह केवल फर्जी पासपोर्ट का मामला नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा में सेंध का मामला है। बांग्लादेशी घुसपैठियों को भारत में बसाने की साजिश के तहत एक पूरा रैकेट काम कर रहा था। खुलासा हो रहा है कि 25 से 30 हजार रुपये की रिश्वत देकर फर्जी दस्तावेज तैयार कराए जाते थे और फिर उसी फर्जी दस्तावेज के आधार पर भारतीय पासपोर्ट हासिल किया जाता था। यह पूरा मामला बताता है कि कैसे 25-30 हजार रुपये में भारतीय नागरिकता बेची जा रही है। फर्जी दस्तावेज, फर्जी सत्यापन और फर्जी पासपोर्ट—ये तीनों मिलकर एक ऐसे नागरिक को तैयार कर रहे हैं, जो कागज पर भारतीय है, लेकिन हकीकत में घुसपैठिया है। जरूरत है कि पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जाए। केवल दलाल ही नहीं, बल्कि वह सरकारी अमला भी पकड़ा जाए, जो चंद हजार रुपये के लिए देश की सुरक्षा को दांव पर लगा देता है। क्योंकि आज सत्तर पासपोर्ट पकड़े गए हैं, कल सात सौ भी बन सकते हैं। तब यह मामला केवल भोपाल-ग्वालियर का नहीं, बल्कि पूरे देश की सुरक्षा का बन जाएगा।
एसटीएफ की गिरफ्त में आए आरोपियों से पूछताछ में पता चला है कि पांच जिलों—भोपाल, ग्वालियर, छिंदवाड़ा और बैतूल—से सत्तर बांग्लादेशियों के फर्जी पासपोर्ट बनवाने के लिए लगभग 17.50 लाख रुपये वसूले गए। यह आंकड़ा डराता है, क्योंकि यह केवल पकड़े गए लोगों का हिसाब है। सोचिए, जो पकड़े नहीं गए, उनकी संख्या कितनी होगी?
भोपाल में डोनेशन वसूला जाता था और हॉस्टल तैयार करवाया जा रहा था। जांच में यह भी सामने आया है कि रियाल नाम का व्यक्ति, जो खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताता था, बांग्लादेश से बच्चों को भोपाल लाकर पढ़ाने, जाली दस्तावेज तैयार करने और उन्हें थाईलैंड, म्यांमार, जापान तथा कंबोडिया भेजने की तैयारी में था। मठ के पीछे 40 बच्चों को लाने की तैयारी थी। भोपाल लाकर पढ़ाने के नाम पर डोनेशन वसूला जा रहा था। एसटीएफ की जांच में यह भी पता चला है कि बांग्लादेशी घुसपैठियों के लिए दस्तावेज बनवाने के बदले 10 से 15 हजार रुपये प्रति व्यक्ति वसूले गए। पुलिस सत्यापन और सरकारी मुहर लगवाने के नाम पर पांच हजार रुपये अलग से खर्च किए गए। यह पूरा खेल दलालों और सरकारी अमले की मिलीभगत से चल रहा था।
जांच में यह बात सामने आई है कि हर घुसपैठिए ने 25 से 30 हजार रुपये खर्च कर भारतीय पासपोर्ट हासिल किए। डबरा, ग्वालियर क्षेत्र में एक ही पते पर 17 बांग्लादेशियों के पासपोर्ट बनने की बात सामने आई है। हर सरकारी मुहर के लिए रिश्वत दी गई। यह रिश्वत की चेन नीचे से ऊपर तक जाती है। दलाल से लेकर सरकारी कर्मचारी और फिर पुलिस सत्यापन तक, हर जगह पैसे का लेन-देन हुआ।
एसटीएफ ने भोपाल में रियाल के साथ रहने वाले सेवक सुभाष और विजय को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। मठ की भूमिका भी संदेह के दायरे में है। एसटीएफ इस पूरे नेटवर्क की गहराई से छानबीन कर रही है। सौ से ज्यादा लोगों से पूछताछ जारी है। पुलिस सत्यापन से जुड़े वर्ष 2021 और वर्ष 2022-23 में पदस्थ रहे 15 अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के दायरे में है। इनमें स्थानीय मददगारों, नगर निगम, राजस्व विभाग, सरपंच, पार्षदों के साथ ही पुलिस के कुछ कर्मचारी भी शामिल हैं।
सबसे गंभीर बात यह है कि बच्चों को लाने की तैयारी हो रही थी। बांग्लादेश से बच्चों को लाकर भोपाल में रखना और फिर उन्हें विदेश भेजना केवल फर्जी पासपोर्ट का मामला नहीं लगता। यह मानव तस्करी और धर्मांतरण जैसे गंभीर आरोपों की ओर भी इशारा करता है। थाईलैंड, म्यांमार जैसे देशों में बच्चों को भेजने की तैयारी क्यों हो रही थी, इसका जवाब अभी जांच में आना बाकी है।
भोपाल और ग्वालियर में राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता किया गया। सरगना रियाल चौधरी डेढ़ साल पहले बांग्लादेश से आया था। उसने सरकारी मुहर लगवाने के लिए हर कदम पर रुपये दिए। अधिकारियों, कर्मचारियों और पुलिस ने चंद रुपयों के लालच में देश की सुरक्षा से समझौता कर लिया। मध्यप्रदेश में ऐसा रैकेट पकड़ा गया है। पहले भी कई बार फर्जी आधार कार्ड और फर्जी पासपोर्ट के मामले सामने आते रहे हैं। इस बार मामला बड़ा है, क्योंकि इसमें बच्चों को लाने और विदेश भेजने की साजिश भी जुड़ी है।
यह पूरा मामला बताता है कि कैसे 25-30 हजार रुपये में भारतीय नागरिकता बेची जा रही है। फर्जी दस्तावेज, फर्जी सत्यापन और फर्जी पासपोर्ट—ये तीनों मिलकर एक ऐसे नागरिक को तैयार कर रहे हैं, जो कागज पर भारतीय है, पर हकीकत में घुसपैठिया है। जरूरत है कि पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जाए। केवल दलाल ही नहीं, बल्कि वह सरकारी अमला भी पकड़ा जाए, जो चंद हजार रुपये के लिए देश की सुरक्षा को दांव पर लगा देता है। क्योंकि आज सत्तर पासपोर्ट पकड़े गए हैं, कल सात सौ भी बन सकते हैं। तब यह मामला केवल भोपाल-ग्वालियर का नहीं, बल्कि पूरे देश की सुरक्षा का बन जाएगा।
















