अशोकनगर जिले के मुंगावली विकासखंड अंतर्गत टोरिया चक प्राथमिक विद्यालय की तस्वीर देखकर कोई भी चौंक जाएगा। बरगद के पेड़ से लटका ब्लैकबोर्ड, जमीन पर बिछी दरी पर बैठे नौनिहाल और पास में बैठी भैंस—यह किसी फिल्म का दृश्य नहीं, बल्कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था की जीवंत हकीकत है। वर्ष 2021 में स्कूल भवन की छत ढह गई थी। उसके बाद से आज तक नया भवन नहीं बना। बच्चे कभी पेड़ के नीचे, कभी किसी की दालान में और कभी टीवी के शोर के बीच पढ़ने को मजबूर हैं।
सबसे बड़ा सवाल भवन का है। सितंबर 2021 में स्कूल भवन की छत गिर गई थी। उससे एक साल पहले ही इसे डिस्मेंटल घोषित कर दिया गया था। नियम के अनुसार तुरंत वैकल्पिक व्यवस्था होनी चाहिए थी, लेकिन चार साल बीत जाने के बाद भी नया भवन नहीं बना। कागजी व्यवस्था में स्कूल को निजी भवन में संचालित दिखाया जा रहा है, लेकिन हकीकत में बच्चे पेड़ के नीचे मच्छरों के बीच बैठकर पढ़ते हैं। कागजों में किराया निकल रहा है और जमीन पर छत नहीं है। यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की आशंका भी पैदा करता है।
इस स्कूल में नौ बच्चे दर्ज हैं। चार बच्चे बिना प्रवेश के बैठते हैं, क्योंकि उनके पास समग्र जन्म प्रमाण पत्र नहीं है। एक नियमित और एक अतिथि शिक्षक तैनात है। यानी शिक्षक पर्याप्त हैं, पर संसाधन नहीं हैं। सरकार समग्र शिक्षा की बात करती है, लेकिन समग्र आईडी के अभाव में बच्चों को प्रवेश ही नहीं मिल रहा। यह कैसी व्यवस्था है, जहां कागज के अभाव में शिक्षा का अधिकार ही छीन लिया जाए?
सरकार हर साल शिक्षा के लिए बजट बढ़ाने और नए स्कूल, भवन व डिजिटल क्लासरूम की बात करती है, लेकिन टोरिया चक की तस्वीर इन दावों की पोल खोल रही है। चार साल से एक छोटे से प्राथमिक विद्यालय का भवन नहीं बन पाया। सरकार को जर्जर भवनों की सूची बनाकर प्राथमिकता से निर्माण कराना चाहिए, कागजी निजी भवनों की जांच होनी चाहिए और दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। क्योंकि पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ने वाला बच्चा जब बड़ा होगा, तो वह यही समझेगा कि उसके लिए केवल नारे थे और हकीकत में कुछ भी नहीं।















