भोपाल, 19 सितंबर।
एक समय था, जब पढ़ा-लिखा युवा कंधे पर एक थैला लेकर घूमता था। थैले में आधार, वोटर आईडी, चरित्र, निवास, जाति, जन्म प्रमाण पत्र, दसवीं-बारहवीं की मार्कशीट, डिग्री और अनुभव प्रमाण पत्र की प्रतियां होती थीं। कोई कागज गीला या गुम न हो जाए, इसका डर रहता था। यह थैला केवल कागजों का नहीं, बल्कि अविश्वास की व्यवस्था का प्रतीक था। हर दफ्तर, संस्था पहले यही मानती थी कि व्यक्ति को अपनी पहचान और योग्यता साबित करनी होगी।
छात्रों को जारी होने वाली अपार आईडी अब पढ़ाई के बाद नौकरी में भी काम आएगी। अपार पोर्टल की प्राइवेसी पॉलिसी में बदलाव के बाद शैक्षणिक ब्योरा शैक्षणिक संस्थानों के अलावा नियोक्ता जैसी अधिकृत थर्ड पार्टी के साथ साझा हो सकेगा। नियोक्ता अपार के डेटा से छात्र की डिग्री और मार्कशीट की जांच कर सकेगा।
अपार यानी ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री। जैसे आधार ने पहचान को एक नंबर में समेट दिया, वैसे ही अपार ने पढ़ाई को एक नंबर में समेट दिया। इसमें मार्कशीट, ग्रेड शीट, डिप्लोमा, सर्टिफिकेट और अन्य शैक्षणिक उपलब्धियां स्टोर रहती हैं। पॉलिसी के अनुसार डेटा उपलब्धता, रिकवरी और सेवा की निरंतरता के लिए थर्ड पार्टी क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर्स का इस्तेमाल और डेटा ट्रांसफर किया जा सकेगा। इससे छात्र का शैक्षणिक रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित रह सकता है।
आज नौकरी में युवा को प्रमाण पत्र देने पड़ते हैं। यह सूची दस से पंद्रह दस्तावेजों तक चली जाती है और हर दस्तावेज के लिए प्रक्रिया होती है। यदि नियोक्ता अपार से ही डिग्री वेरीफाई कर लेगा, तो फर्जी डिग्री पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। छात्र को मूल प्रमाण पत्र लेकर चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और विश्वविद्यालयों को वेरीफिकेशन में लगने वाला समय कम हो सकता है।
युवाओं को समय और पैसे की बचत होगी। अलग-अलग दस्तावेजों में नाम या अन्य जानकारी की विसंगति से होने वाली परेशानी कम हो सकती है। कॉलेज, राज्य या देश बदलने पर एकीकृत शैक्षणिक रिकॉर्ड उपयोगी होगा। सबसे बड़ा लाभ भरोसे का है, क्योंकि नियोक्ता डिजिटल रिकॉर्ड से जानकारी की पुष्टि कर सकेगा।
लेकिन हर डिजिटल व्यवस्था के साथ प्राइवेसी की चिंता भी है। अपार का डेटा थर्ड पार्टी क्लाउड पर रहेगा और डेटा ट्रांसफर भी होगा। इसलिए जरूरी है कि छात्र की स्पष्ट सहमति के बिना कोई नियोक्ता डेटा न देख सके। एक ओटीपी या डिजिटल कंसेंट के माध्यम से अनुमति सुनिश्चित हो और डेटा का उपयोग केवल वेरीफिकेशन तक सीमित रहे। गांव के छात्रों और अभिभावकों को इसके उपयोग और फायदे की जानकारी दी जानी चाहिए।
अपार आईडी का नौकरी में उपयोग केवल तकनीकी बदलाव नहीं, सोच में बदलाव है। यह युवा को बार-बार कागजों की अदालत में खड़ा करने के बजाय उसके डिजिटल रिकॉर्ड पर भरोसा करने की दिशा है। यदि व्यवस्था ठीक से लागू हुई, तो दस्तावेजों का जंगल छोटा होगा और युवा थैला लेकर नहीं, आत्मविश्वास लेकर नौकरी के बाजार में जाएगा, क्योंकि उसके कागज नहीं, उसकी योग्यता बोलेगी और उसका सुरक्षित डिजिटल रिकॉर्ड ही उसका गवाह होगा।















