नई दिल्ली, 21 सितंबर।
यूपीआई केवल भारत का पेमेंट सिस्टम नहीं रहा, यह अब दुनिया के लिए एक मॉडल बन गया है। फ्रांस, सिंगापुर, यूएई जैसे देशों में यूपीआई जैसी व्यवस्था को अपनाया जा रहा है। जब भारत में ही दो हजार रुपये से ऊपर यूपीआई पर चार्ज की चर्चा चलती है, तो इसका असर केवल राजगढ़ या दिल्ली के पंप तक नहीं रहता। इसका असर दुबई से लेकर पेरिस तक की फिनटेक कंपनियों पर पड़ता है। विदेशी निवेशक यह देखता है कि भारत में डिजिटल पेमेंट फ्री रहेगा या पेड होगा। भारत में ही छोटे दुकानदार यूपीआई लेने से कतराने लगेंगे, तो विदेशी बाजार में यह संदेश जाएगा कि भारत का मॉडल टिकाऊ नहीं है और इसका सीधा असर यूपीआई के ग्लोबल विस्तार पर पड़ेगा।
कच्चे तेल और डॉलर पर असर। पेट्रोल पंप पर यूपीआई का विरोध केवल पेमेंट का विरोध नहीं है। यह कैश इकोनॉमी की ओर वापसी का संकेत है। यदि पंपों पर कैश बढ़ेगा तो काले धन का फ्लो बढ़ेगा। यदि काले धन का फ्लो बढ़ा तो अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियां भारत के डिजिटल ट्रांसपेरेंसी इंडेक्स पर सवाल उठाएंगी। असर रेमिटेंस पर है। विदेश में रहने वाले भारतीय यूपीआई के जरिये पैसा भेजने लगे हैं। यदि घरेलू स्तर पर ही यूपीआई पर अतिरिक्त शुल्क वसूला जाने लगा, तो एनआरआई का भरोसा टूटेगा और वे फिर से वेस्टर्न यूनियन जैसे महंगे चैनलों पर लौट जाएंगे। इससे भारत में आने वाला डॉलर महंगा हो जाएगा।
रुपे और वीजा-मास्टरकार्ड की लड़ाई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में असली लड़ाई रुपे कार्ड और वीजा-मास्टरकार्ड की है। सरकार ने रुपे और यूपीआई को फ्री रखकर विदेशी कंपनियों के एकाधिकार को तोड़ा है। यदि अब यूपीआई पर एमडीआर जैसा चार्ज लगेगा तो वीजा और मास्टरकार्ड कहेंगे, देखो, भारत में भी फ्री मॉडल फेल हो गया। और वे फिर से भारतीय बैंकों से ज्यादा फीस वसूलने लगेंगे। इसका नुकसान अंत में भारतीय ग्राहक को ही होगा।
यूपीआई पर दो हजार का चार्ज दिखने में छोटा मुद्दा लगता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में यह भारत की नीयत का पैमाना बन गया है। यदि हम घरेलू स्तर पर ही व्यापारियों का भरोसा नहीं जीत पाए तो हम दुनिया को डिजिटल पेमेंट का रास्ता कैसे दिखाएंगे? इसलिए सरकार को पंप मालिकों और दुकानदारों को समझाना होगा कि यूपीआई पर कोई अतिरिक्त टैक्स नहीं है और यूपीआई का हिसाब अलग तरीके से देखा जाएगा। तभी भारत का डिजिटल झंडा दिल्ली के पंप से लेकर दुबई के मॉल तक लहराता रहेगा।















