भोपाल, 21 सितंबर।
पेट्रोल पंप पर अब नोजल से पहले क्यूआर कोड पर बहस होती है। ग्राहक मोबाइल निकालता है, कर्मचारी बोर्ड की ओर इशारा करता है। बोर्ड पर लिखा है—दो हजार से ऊपर यूपीआई पर अतिरिक्त शुल्क। बस यहीं से शुरू होती है सरकार और पंप मालिकों के बीच की नई तनातनी। एक तरफ सरकार कहती है, यूपीआई फ्री है। दूसरी तरफ दुकानदार कहता है, फ्री का हिसाब तो हम दे रहे हैं। दो हजार की लक्ष्मण रेखा कहां से आई? यह दो हजार का जादुई आंकड़ा किसी सरकारी गजट से नहीं आया, यह डर से आया है।
पिछले कुछ महीनों में छोटे दुकानदारों को जीएसटी के नोटिस मिले हैं। बैंक स्टेटमेंट में यूपीआई की हर एंट्री अब टर्नओवर बनकर दिखती है। चालीस लाख का आंकड़ा पार होते ही सिस्टम नोटिस भेज देता है। पेट्रोल पंप का गणित और भी टेढ़ा है। पेट्रोल-डीजल जीएसटी में नहीं है, पर उसकी बिक्री इनकम टैक्स में पूरी गिनी जाती है। मुनाफा दो से तीन रुपये लीटर और बिक्री लाखों में। जब सारी बिक्री यूपीआई से दिखेगी तो पंप मालिक को लगेगा कि वह कमा तो कम रहा है और हिसाब ज्यादा दे रहा है। इसी डर ने दो हजार की नई दीवार खड़ी कर दी है।
ग्राहक क्यों पिस रहा है? ग्राहक सोचता है, यूपीआई तो सरकार ने फ्री कहा था, फिर पंप वाला पैसा क्यों मांग रहा है? पंप वाला सोचता है, सरकार ने फ्री कहा है, पर टैक्स का नोटिस तो मेरे नाम आ रहा है। और बीच में खड़ा है आम आदमी, जिसके पास कैश नहीं है और यूपीआई पर पेनाल्टी है। कई पंपों पर अब नया ड्रामा है—कैश है तो जल्दी पेट्रोल मिलेगा, यूपीआई है तो नेटवर्क डाउन है। यह नेटवर्क का नहीं, नीयत का डाउन होना है।
समाधान डंडे से नहीं, भरोसे से निकलेगा। इस तनातनी का हल चालान से नहीं, संवाद से निकलेगा। हिसाब की स्पष्टता सरकार को खुलकर बताना होगा कि यूपीआई से हुई बिक्री को टर्नओवर में कैसे गिना जाएगा और छोटे पंपों के लिए कमीशन पर टैक्स मॉडल क्या होगा।
भ्रम तोड़ो अभियान। दो हजार से ऊपर यूपीआई पर कोई सरकारी टैक्स नहीं है। यह बात हर पंप, हर दुकान तक पहुंचनी चाहिए। दो क्यूआर का फॉर्मूला—एक निजी और एक व्यापारिक, ताकि व्यापारी का पर्सनल खर्च और बिजनेस अलग दिखे।
यूपीआई भारत की सबसे बड़ी कामयाबी है। इसे नंबरों से नहीं, भरोसे से नापना होगा। यदि पंप मालिक को भरोसा होगा कि यूपीआई से धंधा बढ़ेगा, नोटिस नहीं, तो वह खुद बोर्ड हटाकर लिखेगा—यूपीआई स्वागत है।
पेट्रोल से इंजन चलता है, भरोसे से अर्थव्यवस्था चलती है। भरोसे का मीटर डाउन हुआ तो डिजिटल इंडिया की गाड़ी भी रिजर्व में आ जाएगी।
















