भोपाल, 09 अप्रैल।
कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने गुरुवार को कहा कि बाल विवाह समाज में व्याप्त एक गंभीर कुप्रथा है और इसे रोकना प्रशासन की प्राथमिकता में शामिल है। उन्होंने कहा कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में 20 अप्रैल को अक्षय तृतीया के अवसर पर होने वाले वैवाहिक कार्यक्रमों में बाल विवाह की आशंका को रोकने के लिए सामुदायिक सहयोग आवश्यक है।
कलेक्टर सिंह ने बताया कि बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के तहत भोपाल जिले में बाल विवाह रोकने के लिए "लाडो अभियान" चलाया जा रहा है। बाल विवाह रोकथाम अधिनियम 2006 की धारा 9, 10, 11 और 13 के तहत बाल विवाह कराने या इसमें सहयोग देने वाले व्यक्ति, संस्था या संगठन के लिए दो साल तक कारावास या एक लाख रुपये जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।
सभी वैवाहिक आयोजकों से अनुरोध किया गया है कि वे अपने कार्यक्रमों में बाल विवाह न करें और इसके लिए शपथ पत्र कलेक्टर कार्यालय एवं महिला एवं बाल विकास जिला कार्यालय में प्रस्तुत करें। इसके अलावा प्रेस, हलवाई, कैटरर्स, धर्मगुरु, समाज के मुखिया, बैंड वाले, घोड़ी वाले और ट्रांसपोर्ट आदि से कहा गया है कि वे केवल आयु प्रमाण पत्र के सत्यापन के बाद ही सेवाएं प्रदान करें, अन्यथा उन्हें भी बाल विवाह का सहयोगी माना जाएगा।
प्रिंटिंग प्रेस से अनुरोध किया गया है कि वे विवाह पत्रिका में स्पष्ट रूप से वर-वधू बालिग होने का उल्लेख करें। यदि आपके क्षेत्र में बाल विवाह होता है तो इसकी सूचना कंट्रोल रूम महिला एवं बाल विकास मोबाइल नंबर-8696389007, सहायक संचालक महिला एवं बाल विकास परियोजना विभिन्न केंद्र, जिला कार्यालय, पुलिस हेल्पलाइन नंबर 112, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 और महिला हेल्पलाइन 181 पर दी जा सकती है।
कलेक्टर ने कहा कि सामुदायिक सतर्कता और प्रशासनिक निगरानी से ही बाल विवाह की घटनाओं को रोका जा सकता है और जिले में सभी संबंधित पक्षों से सहयोग की अपेक्षा है।






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