नई दिल्ली, 10 अप्रैल।
उच्चतम न्यायालय ने 2027 में प्रस्तावित जाति जनगणना पर रोक लगाने की मांग से जुड़ी याचिका को खारिज कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की भाषा पर कड़ी आपत्ति जताते हुए फटकार भी लगाई।
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने याचिकाकर्ता से सवाल किया कि इस तरह की असभ्य भाषा का उपयोग कहां से सीखते हैं और याचिका तैयार करते समय किस प्रकार की भाषा का प्रयोग किया गया है। याचिका में जाति जनगणना 2027 पर रोक लगाने की मांग की गई थी और साथ ही यह भी कहा गया था कि आबादी के अनुपात में संसाधनों का जिम्मेदारीपूर्वक वितरण सुनिश्चित किया जाए। इसके अलावा एक बच्चे वाले परिवारों को आर्थिक प्रोत्साहन देने के लिए दिशा-निर्देश जारी करने की मांग भी रखी गई थी।
उच्चतम न्यायालय ने इससे पहले 2 फरवरी को भी जाति जनगणना की प्रक्रिया, वर्गीकरण और सत्यापन को चुनौती देने वाली एक अन्य याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था। प्रस्तावित 2027 की जनगणना देश की 16वीं राष्ट्रीय जनगणना होगी और यह 1931 के बाद पहली बार व्यापक स्तर पर जाति आधारित गणना के रूप में आयोजित की जाएगी।


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