शिमला, 10 अप्रैल।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्यसभा चुनाव से जुड़े एक मामले में भाजपा सांसद हर्ष महाजन को बड़ी राहत प्रदान की है। अदालत ने कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें हर्ष महाजन की ओर से पेश गवाहों की सूची पर आपत्ति जताते हुए कुछ गवाहों को हटाने की मांग की गई थी।
अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनाव याचिकाओं की सुनवाई ट्रायल जैसी प्रक्रिया होती है, जिसमें साक्ष्य और गवाह अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में केवल इस आधार पर कि कुछ गवाहों की आवश्यकता नहीं है, उनकी सूची से नाम हटाने का आग्रह स्वीकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने माना कि हर्ष महाजन द्वारा प्रस्तुत गवाह सूची नियमों के अनुरूप और वैध है।
हर्ष महाजन की ओर से अधिवक्ता विक्रांत ठाकुर ने पक्ष रखते हुए कहा कि चुनाव याचिका जैसे मामलों में गवाहों का महत्व होता है और उन्हें हटाया नहीं जा सकता। वहीं, अभिषेक मनु सिंघवी की ओर से दायर आवेदन में तर्क दिया गया था कि कुछ गवाहों को शामिल करने से सुनवाई लंबी खिंच सकती है और दोहराव की स्थिति बन सकती है। अदालत ने इस दलील को अस्वीकार कर दिया।
फैसले के बाद विक्रांत ठाकुर ने अनौपचारिक बातचीत में कहा कि अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव मामलों में गवाहों की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वहीं हर्ष महाजन ने इसे निष्पक्ष सुनवाई की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि सच्चाई सामने आएगी और उनके गवाह मामले के तथ्यों को स्पष्ट करेंगे। भाजपा ने भी इस निर्णय को कानूनी रूप से राहतपूर्ण बताया।
उल्लेखनीय है कि 27 फरवरी 2024 को हिमाचल प्रदेश की एक राज्यसभा सीट के लिए चुनाव हुआ था, जिसमें सभी 68 विधायकों ने मतदान किया था। कांग्रेस के बहुमत के बावजूद भाजपा उम्मीदवार हर्ष महाजन विजयी रहे थे, जिसमें क्रॉस वोटिंग और निर्दलीय विधायकों के समर्थन की भूमिका रही थी।
चुनाव में दोनों उम्मीदवारों को 34-34 वोट मिले थे, जिसके बाद निर्वाचन आयोग ने ड्रॉ ऑफ लॉट्स की प्रक्रिया अपनाई। पर्ची प्रक्रिया में अभिषेक मनु सिंघवी का नाम आने पर उन्हें पराजित घोषित किया गया और हर्ष महाजन विजयी घोषित हुए।
इसके बाद सिंघवी ने चुनाव परिणाम को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। अब गवाहों से जुड़ी याचिका खारिज होने के बाद मामले की सुनवाई आगे साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर जारी रहेगी।


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