संभल, 02 जुलाई।
संभल जिले में करीब 100 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन पर कथित अवैध कब्जा कराने के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नगर पालिका परिषद के तत्कालीन अधिशासी अधिकारी राजकुमार गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों और अभिलेखों में कथित गड़बड़ी के जरिए भूमाफियाओं को लाभ पहुंचाने में उनकी अहम भूमिका रही। प्रशासन ने संबंधित भूमि को कब्जामुक्त भी करा लिया है।
पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने बताया कि तीन दिन पहले जिलाधिकारी स्तर पर ग्राम सभा की करीब 100 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन के गबन से जुड़ी जानकारी सामने आई थी। इसके बाद अभिलेखों की जांच में लेखपाल की शिकायत के आधार पर तत्कालीन उप संचालक चकबंदी और तत्कालीन अधिशासी अधिकारी राजकुमार गुप्ता की भूमिका सामने आई। जांच में आरोप है कि निजी लाभ के उद्देश्य से दस्तावेजों में कथित हेरफेर की गई और कुछ फर्जी नामों पर नामांतरण दर्ज कराया गया।
पुलिस के अनुसार बाद में कुछ लोगों ने स्वयं को भूमि का स्वामी बताते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। आरोप है कि वर्ष 2013 में तत्कालीन अधिशासी अधिकारी ने न्यायालय में आवेदन देकर कहा कि नगर पालिका इस मामले में पैरवी करने की इच्छुक नहीं है। इसके बाद संबंधित भूमि पर कथित रूप से अवैध निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियां शुरू हो गईं, जिससे सरकार को 100 करोड़ रुपये से अधिक की क्षति होने का आरोप है। दस्तावेजों के आधार पर जांच के बाद प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर भूमि को कब्जामुक्त कराया।
पुलिस का कहना है कि राजकुमार गुप्ता ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए न्यायालय में भ्रामक शपथ पत्र प्रस्तुत किए और सरकारी जमीन को निजी लाभ के लिए इस्तेमाल कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मामले में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं और सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम के तहत पहले से मुकदमा दर्ज है।
एसपी ने बताया कि आरोपित राजकुमार गुप्ता को बीती रात गिरफ्तार किया गया। वर्तमान में वह शाहजहांपुर में सहायक नगर आयुक्त के पद पर तैनात हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि उनके खिलाफ 44 लाख रुपये के कथित गबन का एक अन्य मामला वर्ष 2022 से दर्ज है। शासन स्तर पर पूर्व में दो बार दंडित किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस इस प्रकरण में तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष सहित अन्य संबंधित लोगों से भी पूछताछ कर रही है। जिनके खिलाफ साक्ष्य मिलेंगे, उनके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। नामजद अन्य आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।
पुलिस अधीक्षक ने जिले के लोगों से अपील की है कि यदि तत्कालीन अधिशासी अधिकारी के कार्यकाल से जुड़े अन्य मामलों की जानकारी हो तो वे पुलिस को उपलब्ध कराएं। उन्होंने बताया कि मामले की विवेचना क्षेत्राधिकारी कुलदीप कुमार कर रहे हैं और जांच सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर आगे बढ़ाई जा रही है।
















