योग्याकार्ता, 8 जुलाई।
भारत और इंडोनेशिया ने साझा सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। दोनों देशों ने मिलकर योग्याकार्ता स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल, प्रम्बानन मंदिर परिसर के संरक्षण के लिए एक संयुक्त परियोजना शुरू की है। यह महत्वपूर्ण पहल दोनों देशों के बीच प्राचीन सभ्यतागत संबंधों को नई मजबूती प्रदान करेगी।
यह परियोजना दस वर्षों तक चलेगी, जिसमें मंदिर के दूसरे प्रांगण में स्थित 'परवारा' या सहायक मंदिरों के जीर्णोद्धार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। मूल रूप से इस परिसर में चार संकेंद्रित पंक्तियों में 224 मंदिर बनाए गए थे, जिनमें से अब तक मात्र छह का ही पुनर्निर्माण हो पाया है। शेष 200 से अधिक मंदिर अभी भी जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं।
संरक्षण का यह कार्य परिसर के उत्तर-पूर्वी हिस्से से शुरू होगा, जिसमें आधुनिक तकनीक और पुरातत्व विशेषज्ञों का तालमेल देखने को मिलेगा। इसके तहत एआई-आधारित डिजिटल पुनर्निर्माण, वैज्ञानिक जांच और 'एनास्टिलोसिस' पद्धति का उपयोग किया जाएगा, ताकि पत्थरों को उनकी मूल स्थिति में सुरक्षित रखा जा सके।
इस कार्यक्रम के माध्यम से ऐतिहासिक ढांचों के संरक्षण के साथ-साथ बेहतर जल निकासी और साइट प्रबंधन पर भी जोर दिया जाएगा। साथ ही, यह पहल दोनों देशों के विशेषज्ञों के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान और क्षमता निर्माण का एक सशक्त माध्यम भी बनेगी।
नवी शताब्दी में मातराम साम्राज्य के दौरान निर्मित यह परिसर इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर है, जिसे 1991 में यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर का दर्जा दिया गया था। यह सहयोगात्मक प्रयास इस अद्भुत स्थापत्य कला को आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित करने का संकल्प है।
















