नई दिल्ली, 08 जुलाई।
इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) में आगामी 2026-27 सीजन से बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) और आईएसएल प्रबंधन समिति ने लीग के संचालन मॉडल में बदलाव की घोषणा की है। नए प्रारूप के तहत लीग की व्यावसायिक जिम्मेदारियां क्लबों के पास रहेंगी, जबकि प्रशासन और नियमों की निगरानी एआईएफएफ करेगा।
नई व्यवस्था के अनुसार, आईएसएल अब क्लब आधारित व्यावसायिक मॉडल पर संचालित होगी। प्रसारण और प्रायोजन से जुड़े अधिकारों की जिम्मेदारी आईएसएल प्रबंधन समिति संभालेगी। वहीं, लीग के नियमों और संचालन से जुड़े मामलों की देखरेख एआईएफएफ के पास रहेगी।
एआईएफएफ के उप महासचिव एम. सत्यनारायण ने कहा कि महासंघ का लक्ष्य आईएसएल को एशिया की प्रमुख फुटबॉल लीग में शामिल करना है। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था में खेल प्रशासन से जुड़े नियमों और आवश्यक प्रक्रियाओं का पूरा ध्यान रखा जा रहा है।
नई प्रणाली के तहत आईएसएल प्रबंधन समिति प्रसारण साझेदारों के चयन और व्यावसायिक सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम करेगी। वहीं, एआईएफएफ 2026-27 सीजन में शामिल होने वाले सभी 14 क्लबों से उनकी भागीदारी की पुष्टि करेगा।
नॉर्थईस्ट यूनाइटेड एफसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मंदार तम्हाणे ने कहा कि क्लब आधारित मॉडल का उद्देश्य लीग को लंबे समय तक आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। उन्होंने बताया कि यह प्रसारण आधारित मॉडल होगा, जिससे क्लबों और लीग को भविष्य में आर्थिक स्थिरता मिल सकेगी।
2026-27 सीजन में आईएसएल एक बार फिर होम-अवे फॉर्मेट में खेली जाएगी। इसके तहत सभी टीमें अपने घरेलू मैदान पर और विपक्षी टीम के मैदान पर मुकाबले खेलेंगी।
एफसी गोवा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रवि पुस्कुर ने कहा कि पूरे सीजन के आयोजन से लीग को और बेहतर बनाने में सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि आईएसएल का कैलेंडर अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल कार्यक्रमों के अनुसार तैयार किया जाएगा, जिसमें भारतीय क्लबों की एशियाई प्रतियोगिताओं में भागीदारी को भी ध्यान में रखा जाएगा।
एआईएफएफ ने बताया कि राष्ट्रीय टीम की तैयारियों के लिए खिलाड़ियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को लेकर क्लबों के साथ बातचीत जारी है। अधिकारियों का मानना है कि नया मॉडल भारतीय फुटबॉल को मजबूत करने और आईएसएल के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
















