अनूपपुर, 08 जुलाई।
मध्य प्रदेश शिक्षक संघ ने 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित करने की मांग तेज कर दी है। संघ के जिला अध्यक्ष संजय निगम के नेतृत्व में शिक्षकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने सांसद हिमांद्री सिंह से मुलाकात कर उन्हें अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा है।
शिक्षकों की मुख्य मांग है कि वर्ष 2010 से पहले नियुक्त हुए अनुभवी शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता से स्थायी रूप से मुक्त रखा जाए। संघ का तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय से दशकों से सेवाएं दे रहे शिक्षकों में भविष्य को लेकर असुरक्षा की भावना पैदा हो गई है।
शिक्षकों का मानना है कि नियुक्ति के बाद पात्रता मानदंडों में बदलाव करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि संसद के आगामी सत्र में विशेष विधायी संशोधन लाकर इस वर्ग को सेवा सुरक्षा प्रदान की जाए।
ज्ञापन में स्पष्ट कहा गया है कि अनुभवी शिक्षकों की वरिष्ठता, पदोन्नति और अन्य सेवा लाभों का संरक्षण सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। इससे शिक्षा व्यवस्था की स्थिरता बनी रहेगी और शिक्षकों का मनोबल भी नहीं गिरेगा।
सांसद हिमांद्री सिंह ने प्रतिनिधिमंडल की समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुनने के बाद उन्हें आश्वस्त किया है। उन्होंने कहा कि वह शिक्षकों की इस न्यायोचित मांग को प्रधानमंत्री और शिक्षा मंत्री तक पहुंचाने के साथ ही संसद सत्र में भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएंगी।
















