उज्जैन, 08 जुलाई।
मध्य प्रदेश के उज्जैन में आगामी सिंहस्थ 2028 को लेकर जारी तैयारियों के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। निर्मोही अखाड़ा ने अपना रुख बदलते हुए महंत रविंद्र पुरी को अपना समर्थन देने का ऐलान किया है। उल्लेखनीय है कि चार महीने पहले इसी अखाड़े ने उनके नेतृत्व को स्वीकार करने से स्पष्ट इनकार कर दिया था।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद में नेतृत्व को लेकर लंबे समय से खींचतान चल रही है। संगठन के भीतर दो अलग-अलग धड़े सक्रिय हैं, जिनमें से एक गुट निरंजनी अखाड़े के सचिव महंत रविंद्र पुरी को अपना नेता मानता है, तो दूसरा पक्ष महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव रविंद्र पुरी के साथ है।
मंगलवार की रात उज्जैन में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद निर्मोही अखाड़े ने यह निर्णय लिया कि वह नासिक कुंभ और सिंहस्थ 2028 की सभी व्यवस्थाओं में महंत रविंद्र पुरी की परिषद का साथ देगा। इस बैठक की अध्यक्षता स्वयं महंत रविंद्र पुरी ने की, जिसमें अखाड़े के तमाम वरिष्ठ पंच उपस्थित रहे।
निर्मोही अखाड़े के राष्ट्रीय प्रवक्ता महंत सीताराम दास ने साफ किया कि परिषद को लेकर जो भ्रम की स्थिति बनी थी, उसे अब दूर कर लिया गया है। उन्होंने याद दिलाया कि प्रयागराज कुंभ का सफल संचालन भी इन्हीं के नेतृत्व में हुआ था, इसलिए अब भविष्य के कुंभ आयोजनों में भी वे एकजुट होकर काम करेंगे।
समर्थन प्राप्त करने के बाद महंत रविंद्र पुरी ने दावा किया कि उनके साथ जूना, आह्वान, अग्नि, निरंजनी, आनंद, पंच निर्मोही, निर्मल और बड़ा उदासीन जैसे प्रमुख अखाड़े जुड़ गए हैं। उन्होंने कहा कि अब रामदल और शंभू दल एक मंच पर आ गए हैं और संतों को एकजुट करने का प्रयास निरंतर जारी रहेगा।
याद रहे कि 22 मार्च को कई अखाड़ों ने महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव रविंद्र पुरी के नेतृत्व में आस्था जताई थी। अखाड़ा परिषद में यह विवाद हरिद्वार कुंभ 2021 के बाद अध्यक्ष नरेंद्र गिरि के निधन के बाद उपजा था। तब से ही दोनों गुट अलग-अलग फैसले लेने को मजबूर थे, लेकिन अब निर्मोही अखाड़े के इस नए कदम ने समीकरण बदल दिए हैं।
















