भोपाल, 8 जुलाई।
राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) में प्रशासनिक स्तर पर बड़ा बदलाव किया गया है। जून-जुलाई 2026 की परीक्षाओं के बेहतर संचालन को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा नियंत्रक की जिम्मेदारी में परिवर्तन करते हुए प्रो. अर्चना तिवारी को पद से मुक्त कर दिया है। अब यह जिम्मेदारी प्रो. संजीव शर्मा को सौंपी गई है।
विश्वविद्यालय प्रशासन के आदेश के अनुसार प्रो. अर्चना तिवारी को परीक्षा से जुड़े सभी कार्यों से तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। उनके कार्यालय में कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों को भी परीक्षा संबंधी जिम्मेदारियों से अलग कर दिया गया है।
इसके साथ ही प्रो. अर्चना तिवारी को स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी के प्रभारी निदेशक पद से भी मुक्त कर दिया गया है। उपकुलसचिव (प्रशासन) की ओर से जारी आदेश में बताया गया कि उनके स्थान पर डॉ. जितेंद्र अग्रवाल को आगामी आदेश तक प्रभारी निदेशक नियुक्त किया गया है।
प्रो. तिवारी को डायरेक्टर आईक्यूएसी (IQAC) सहित अन्य अतिरिक्त दायित्वों से भी मुक्त कर दिया गया है। वहीं परीक्षा व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए प्रो. संजीव शर्मा को दोबारा परीक्षा नियंत्रक नियुक्त किया गया है। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।
आदेश में प्रो. अर्चना तिवारी के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने के संकेत भी दिए गए हैं। उपकुलसचिव (स्थापना) को जांच अधिकारी नियुक्त करने, आरोप पत्र जारी करने और आगे की प्रक्रिया के लिए प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह कार्रवाई तीन सदस्यीय जांच समिति की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर की है। समिति ने प्रारंभिक जांच में प्रश्नपत्रों की गोपनीयता, परीक्षा संचालन में प्रशासनिक नियंत्रण, सुरक्षा व्यवस्था और मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के पालन को लेकर कमियां पाए जाने की बात कही है।
विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश कुलपति की स्वीकृति के बाद जारी किया गया है और इसे तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है। आदेश जारी होने के बाद विश्वविद्यालय परिसर में प्रशासनिक बदलाव को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि आदेश में विभागीय जांच के विस्तृत कारणों का उल्लेख नहीं किया गया है।
हाल ही में आरजीपीवी में प्रश्नपत्र चोरी और लीक से जुड़े मामलों के सामने आने के बाद यह बदलाव किया गया है। इसे परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
















