रांची, 08 जुलाई।
राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) परिसर में हुए अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान सरकारी काम में बाधा डालने की आरोपी केंद्रीय सरना समिति की अध्यक्ष निशा भगत को झारखंड उच्च न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। जस्टिस एस.के. द्विवेदी की अदालत ने निशा भगत की अग्रिम जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया है।
अभियान के दौरान पुलिस कर्मियों के साथ कथित दुर्व्यवहार को लेकर राज्य सरकार ने जमानत का कड़ा विरोध किया था। सरकारी पक्ष का कहना था कि निशा भगत ने न्यायालय के आदेश के पालन में जुटी पुलिस की कार्रवाई को रोकने की कोशिश की थी।
बता दें कि वर्ष 2025 में रिम्स और डीआईजी मैदान क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने के दौरान काफी हंगामा हुआ था। उस वक्त निशा भगत ने कार्रवाई के विरोध में बुलडोजर के सामने लेटकर जमकर प्रदर्शन किया था।
सदर थाना में निशा भगत के खिलाफ कांड संख्या 608/2025 दर्ज किया गया था। इस मामले में पुलिस ने उन्हें हिरासत में भी लिया था। दूसरी तरफ, निशा भगत ने पुलिस पर अभद्रता और मारपीट के गंभीर आरोप लगाए थे।
हाईकोर्ट से मिली इस कानूनी राहत के बाद अब निशा भगत को गिरफ्तारी का भय नहीं है। हालांकि पुलिस इस पूरे मामले की विवेचना कर रही है और जांच के बाद आगे की विधिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
















