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27 Feb, 2026

कृषि विश्वविद्यालय में गिद्ध संरक्षण कार्यशाला, पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने पर जोर

हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित गिद्ध संरक्षण कार्यशाला में विशेषज्ञों ने गिद्धों के पारिस्थितिक महत्व और जनस्वास्थ्य योगदान पर चर्चा की। संरक्षण और सुरक्षित आहार स्थलों की आवश्यकता पर जोर।

धर्मशाला, 27 फ़रवरी।

चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर में डॉ. जी.सी. नेगी पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय द्वारा गिद्ध संरक्षण पर विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने भाग लेकर गिद्धों के सतत और समन्वित संरक्षण की आवश्यकता पर चर्चा की।

कार्यशाला में अंतरराष्ट्रीय संरक्षण विशेषज्ञ क्रिस बाउडेन, वरिष्ठ पशु चिकित्सक एवं वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. पर्सी अवारी और प्रख्यात पक्षी विज्ञानी डॉ. माल्यास्री भट्टाचार्य ने गिद्धों की पारिस्थितिक भूमिका, पशु चिकित्सा महत्व और जनस्वास्थ्य के संदर्भ में उनके योगदान पर प्रकाश डाला। विशेषज्ञों ने बताया कि कांगड़ा जिले में सुरक्षित आहार स्थलों के कारण गिद्धों की आबादी स्वस्थ बनी हुई है और इन स्थलों के संरक्षण पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

गिद्ध मृत पशुओं को नष्ट कर रोगों जैसे रेबीज़, तपेदिक और प्लेग के प्रसार को रोकने में मदद करते हैं। हालांकि, एनएसएआईडी दवाओं के उपयोग से गिद्धों की संख्या में गिरावट देखी गई है। इसलिए पशु चिकित्सकों से आग्रह किया गया कि वे गिद्ध-सुरक्षित विकल्प अपनाएं।

कार्यशाला के दौरान छात्रों के लिए ऑनलाइन प्रश्नोत्तरी आयोजित की गई और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। कुलपति डॉ. अशोक कुमार पांडा ने संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण और वैज्ञानिक, उत्तरदायी हस्तक्षेप की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम का समापन गिद्ध संरक्षण और क्षेत्रीय पारिस्थितिक संतुलन को सुनिश्चित करने के लिए सतत अनुसंधान, नीति सहयोग और सामुदायिक सहभागिता के आह्वान के साथ हुआ।

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