नई दिल्ली, 10 अप्रैल 2026।
दक्षिण जिला साइबर थाना पुलिस ने विदेश में नौकरी और वीजा दिलाने के नाम पर लोगों से धोखाधड़ी करने वाले एक संगठित अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में पुलिस ने तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है, जबकि इस गिरोह का मुख्य सरगना अभी फरार बताया जा रहा है। आरोपितों के पास से बड़ी मात्रा में फर्जी दस्तावेज, पासपोर्ट और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए हैं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार एनसीआरपी पोर्टल पर मिली शिकायत के आधार पर कार्रवाई शुरू की गई थी। शिकायतकर्ता को व्हाट्सएप के माध्यम से विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा दिया गया और वीजा प्रक्रिया के नाम पर उससे पैसे वसूले गए। रकम प्राप्त होने के बाद आरोपितों ने संपर्क तोड़ दिया और फरार हो गए।
जांच के दौरान संदिग्ध मोबाइल नंबर की तकनीकी निगरानी की गई, जिसमें उसकी लोकेशन दिल्ली के रानी बाग क्षेत्र में पाई गई। इसके बाद पुलिस टीम ने छापेमारी कर तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में साइबर थाना दक्षिण में मामला दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की गई है।
गिरफ्तार आरोपितों की पहचान अलग-अलग राज्यों से जुड़े व्यक्तियों के रूप में हुई है, जबकि पूछताछ में यह सामने आया कि इस पूरे गिरोह का संचालन एक व्यक्ति द्वारा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से किया जा रहा था, जो लोगों को विदेश में नौकरी का लालच देकर फंसाता था।
पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से छह स्मार्टफोन, दो लैपटॉप, चार डेस्कटॉप कंप्यूटर, चौदह पासपोर्ट, फर्जी वीजा और दस्तावेजों से भरी एक पेनड्राइव, तीन फर्जी मोहरें और अन्य डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं। सभी उपकरणों को आगे की जांच के लिए फॉरेंसिक प्रयोगशाला भेज दिया गया है।
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपित सोशल मीडिया और व्हाट्सएप के जरिए लोगों को विदेश में नौकरी का लालच देकर फर्जी वेबसाइटों पर भेजते थे और नकली वीजा दिखाकर उनसे पंद्रह हजार से नब्बे हजार रुपये तक वसूलते थे। पैसे मिलते ही वे संपर्क तोड़ देते थे।
पुलिस अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है और देशभर में ठगी के शिकार हुए लोगों की पहचान की जा रही है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि विदेश में नौकरी या वीजा के नाम पर किसी भी अनजान व्यक्ति को पैसे देने से पहले पूरी तरह जांच अवश्य करें।






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