रांची, 20 मार्च 2026।
बोकारो की 18 वर्षीय युवती की गुमशुदगी मामले में झारखंड उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कड़ी कार्रवाई करते हुए बोकारो के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को तलब किया। अदालत ने वर्चुअल सुनवाई के दौरान सवाल किया कि सनहा दर्ज होने के बाद प्राथमिक सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज करने में 10 दिन की देरी क्यों हुई और दोषी थाना प्रभारी के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।
अदालत ने एसपी को 23 मार्च को सशरीर अदालत में उपस्थित होकर केस डायरी, जांच की अद्यतन स्थिति और अनुसंधान की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि जांच संतोषजनक नहीं पाई गई, तो मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपा जा सकता है।
यह मामला न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष सुना गया। सुनवाई के दौरान बोकारो एसपी ने अदालत में दाखिल शपथ पत्र में संशोधन के लिए समय देने की अपील की। वहीं याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विनसेंट रोहित मार्की और शांतनु गुप्ता ने पक्ष रखा।
अदालत ने पहले भी पुलिस से सवाल किया था कि युवती सात माह से लापता है, उसकी बरामदगी के लिए अब तक क्या प्रयास किए गए और उसे कब तक खोजा जाएगा। एसपी ने बताया कि बोकारो और आसपास के तीन-चार स्थानों पर छापेमारी की गई है और एक संदिग्ध को हिरासत में लेकर नार्को टेस्ट की प्रक्रिया चल रही है।
युवती की मां ने हेबियस कॉर्पस याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया कि युवती 31 जुलाई 2025 से लापता है और इस संबंध में पिंडराजोड़ा थाना में कांड संख्या 147/2025 दर्ज किया गया था।
परिजनों को 11 दिसंबर 2025 को एक कॉल आया जिसमें बताया गया कि युवती पुणे में है। इसके बाद पुलिस ने कॉल करने वाले युवक को पकड़ लिया। पूछताछ में उसने बताया कि युवती उसके दोस्त के पास पुणे में है।
पुलिस टीम युवती के पिता के साथ आरोपी युवक को ट्रेन से पुणे ले जा रही थी, लेकिन रास्ते में आरोपी पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया। इसके बाद अब तक युवती का कोई सुराग नहीं मिल सका है, जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।




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