खरगोन, 28 जुलाई।
एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स ने खरगोन दंगा मामले में 11 आरोपितों को बरी किए जाने के अतिरिक्त सत्र न्यायालय के फैसले का स्वागत किया है। संगठन ने इसे निष्पक्ष सुनवाई और विधिक प्रक्रिया के सिद्धांतों की जीत बताया।
यह मामला 10 अप्रैल 2022 को राम नवमी जुलूस के दौरान खरगोन के भटवाड़ी मोहल्ला में हुई सांप्रदायिक हिंसा से जुड़ा था। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया था कि मुस्लिम युवकों के एक समूह ने हिंदू आबादी पर पथराव किया, ज्वलनशील पदार्थों से हमला किया, संपत्ति को नुकसान पहुंचाया तथा दंगा, आगजनी, आपराधिक षड्यंत्र, अवैध प्रवेश और विस्फोटक पदार्थों से जुड़े अपराध किए।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान एपीसीआर की ओर से अधिवक्ता रेखा श्रीवास्तव ने आरोपितों का पक्ष रखा। उन्होंने अदालत में दलील दी कि अभियोजन पक्ष आरोपों को विश्वसनीय साक्ष्यों के आधार पर साबित नहीं कर सका और आपराधिक मामलों में आवश्यक मानक के अनुरूप आरोप संदेह से परे सिद्ध करने में विफल रहा।
एपीसीआर के राष्ट्रीय सचिव नदीम खान ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह निर्णय संविधान के तहत निष्पक्ष सुनवाई, विधिक प्रक्रिया और कानून के समक्ष समान संरक्षण के सिद्धांतों को मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि एपीसीआर भविष्य में भी धर्म या पहचान से परे जाकर गलत मामलों का सामना कर रहे लोगों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराती रहेगी और नागरिकों के मौलिक एवं संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए अपनी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करती रहेगी।


















