भोपाल, 09 अप्रैल।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में तीन प्रमुख अंतर्राज्यीय सिंचाई परियोजनाएं किसानों की समृद्धि और राज्य की विकास गाथा की नींव बन रही हैं, जिनसे खेतों तक पानी पहुंचते ही मिट्टी सोना उगलेगी और किसान वर्ष में तीन फसलें ले सकेंगे।
प्रदेश सरकार उत्तर प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र के साथ मिलकर केन-बेतवा लिंक, पार्वती-चंबल-कालीसिंध और मेगा तापी अंडरग्राउंड वाटर रीचार्ज परियोजनाओं पर तेजी से कार्य कर रही है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से मध्यप्रदेश में कृषि, उद्योग और पेयजल के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध होगा। केंद्र सरकार परियोजनाओं पर आने वाली लागत का 90 प्रतिशत वहन करेगी। वर्तमान में प्रदेश का सिंचाई क्षेत्र 55 लाख हेक्टेयर है, जिसे 2028-29 तक 100 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना देश की पहली अंतर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोजना है, जिसकी कुल लागत 44,604 करोड़ रूपये है। मध्यप्रदेश में 24,293 करोड़ रूपये की लागत से परियोजना का कार्य प्रारंभ हुआ और इसके प्रथम चरण का शिलान्यास दिसंबर 2025 में प्रधानमंत्री द्वारा किया गया। परियोजना से 8.11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता विकसित होगी, 126 एम.सी.एम. जल से 10 जिलों की 41 लाख आबादी को पेयजल मिलेगा और 103 मेगावाट विद्युत उत्पादन होगा।
संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना से मालवा और चंबल क्षेत्र के 13 जिलों के 6.15 लाख हेक्टेयर में सिंचाई उपलब्ध होगी और 43 लाख आबादी को 61 एम.सी.एम. जल पेयजल के रूप में मिलेगा। परियोजना से 7.84 लाख किसानों का जीवन समृद्ध होगा और 22 वृहद सिंचाई योजनाओं के निर्माण के साथ 60 वर्ष पुरानी नहर प्रणाली का आधुनिकीकरण किया जाएगा।
मेगा तापी रीचार्ज परियोजना के अंतर्गत भू-गर्भ जल पुर्नभरण के माध्यम से 1.23 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की जाएगी। मई 2025 में मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र सरकारों द्वारा इसे राष्ट्रीय परियोजना के रूप में स्वीकृत किया गया। प्रदेश में माइक्रो सिंचाई में अग्रणी होने के कारण जल का अधिकतम उपयोग कर प्रत्येक किसान के खेत तक पाइपलाइन से पानी पहुँचाया जा रहा है।








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